बांग्लादेश : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंसानी अधिकारों के उल्लंघन, हिंसा भड़काने, और 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हत्याओं का मास्टरमाइंड मानते हुए ढाका के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने फांसी की सजा सुनाई है. इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी मौत की सजा दी गई है।
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कोर्ट का फैसला……
- अदालत ने माना कि शेख हसीना ने 2024 के छात्र-आंदोलन के दौरान वहशी कार्रवाई और हिंसक दमन का आदेश दिया था, जिसमें 1400 से अधिक लोगों की मौत हुई।
- कोर्ट ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों जैसे हत्या, हत्या का प्रयास, टॉर्चर, एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग, और घातक हथियारों के प्रयोग के लिए दोषी ठहराया।
- फैसला अनुपस्थिति में सुनाया गया क्योंकि 2024 में सरकार गिरने के बाद शेख हसीना भारत में थीं।
- कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही ढाका सहित प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी है।
हसीना की प्रतिक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया……
- शेख हसीना ने इस फैसले को एकतरफा और राजनीतिक बदले की कार्यवाही बताया है, उन्होंने बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार पर पक्षपात के आरोप लगाए।
- विपक्ष एवं अवामी लीग के समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर भारी असंतोष और तनाव है।
अन्य प्रमुख जानकारी…
- कोर्ट ने लगभग 400 पेज का फैसला सुनाया, जिसमें तीनों आरोपियों के खिलाफ सबूत प्रस्तुत किए गए।
- पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल-मामून को सरकारी गवाह बनने के कारण कम सजा दी गई है, लेकिन शेख हसीना और गृह मंत्री को मौत की सजा बरकरार रखी गई।
यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक व बहुप्रश्ननीय मोड़ माना जा रहा है।
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