बांग्लादेश के जशोर जिले के मनीरामपुर में सोमवार को एक हिंदू पत्रकार की हत्या कर दी गई। बदमाशों ने राणा प्रताप नामक हिंदू युवक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना कोपलिया बाजार इलाके की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे।



यह हत्या ऐसे समय में हुई है, जब हाल के महीनों में देश में एक हिंदू विधवा के साथ बलात्कार और कम से कम तीन हिंदू पुरुषों की हत्याएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार, राणा प्रताप की हत्या सोमवार शाम करीब 6 बजे दक्षिण-पश्चिमी बांग्लादेश के जशोर जिले के मनीरामपुर उप-जिले के कोपलिया बाजार इलाके में हुई। मनोहरपुर यूनियन परिषद के अध्यक्ष अख्तर फारुक मिंटू ने बताया कि राणा प्रताप एक स्कूल शिक्षक के बेटे थे और पिछले दो साल से कोपलिया बाजार में बर्फ का कारखाना चला रहे थे। सोमवार शाम कुछ लोग उन्हें कारखाने से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और वहां सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
स्थानीय निवासी रिपन हुसैन ने बताया कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे। पहले उनका राणा प्रताप से झगड़ा हुआ, फिर उन्होंने उसके सिर में कई गोलियां मारीं और मौके से फरार हो गए। प्रताप के शव के पास से सात खाली कारतूस बरामद हुए।
एक स्थानीय सूत्र के अनुसार, राणा प्रताप के खिलाफ जशोर जिले के अलग-अलग पुलिस थानों में कई मामले दर्ज थे। यह भी कहा जा रहा है कि वह एक चरमपंथी समूह से जुड़े हुए थे। राणा प्रताप नरैल जिले से निकलने वाले दैनिक अखबार ‘बी.डी. खोबोर’ के कार्यवाहक संपादक भी थे।
अखबार के समाचार संपादक अबुल कासिम ने बताया कि राणा प्रताप उनके अखबार के कार्यवाहक संपादक थे। उन्होंने कहा कि एक समय उनके खिलाफ मामले जरूर दर्ज थे, लेकिन बाद में वे सभी मामलों में बरी हो गए थे। अबुल कासिम ने यह भी कहा कि हत्या के पीछे की वजह उन्हें नहीं पता है।
वहीं, केशबपुर उप-जिले की सुफलकटी यूनियन में बीएनपी के महासचिव और अरुआ गांव के निवासी जहांगीर आलम ने आरोप लगाया कि राणा प्रताप एक चरमपंथी संगठन से जुड़े थे।



