जमशेदपुर : बिष्टुपुर में शनिवार देर रात बाजार निकले आम नागरिकों, महिलाओं और दुकानों के आसपास मौजूद लोगों पर पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना से जुड़े वायरल वीडियो सामने आने के बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) के सुप्रीमो जयराम महतो ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखा आक्रोश जताते हुए इसे “पुलिसिया बर्बरता” करार दिया है. महतो ने कहा कि कानून का मकसद जनता को सुरक्षा देना और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है, न कि लाठियों के दम पर आम लोगों में डर पैदा करना। उन्होंने कहा कि यदि रात में बाजार में मौजूद महिलाओं, परिवारों और दुकानदारों के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अपराधियों पर लगाम नहीं, जनता पर डंडा क्यों?……
जयराम महतो ने शहर में हाल के आपराधिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए पुलिस और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बैंक डकैती, रेस्टोरेंट में फायरिंग और छिनतई जैसी वारदातें चिंता बढ़ा रही हैं, जबकि आम नागरिकों के साथ पुलिस का सख्त रवैया देखने को मिल रहा है. उनका आरोप है कि पुलिस अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के बजाय रात में परिवार के साथ चाय, कॉफी या आइसक्रीम के लिए निकले आम लोगों को निशाना बना रही है. महतो ने तंज कसते हुए कहा कि “एक तरफ शराब की दुकानें रात 11 बजे तक खुली रहने की छूट है, दूसरी तरफ शांतिपूर्ण तरीके से बाहर निकले नागरिकों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।”
“जमशेदपुर में फिर 90 के दशक जैसा डर?”…….
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए JKLM सुप्रीमो ने कहा कि एक ओर राज्य में विदेशी निवेश और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में 90 के दशक जैसा भय का माहौल पैदा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से घटना को लेकर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की. बिष्टुपुर की रात की इस घटना ने अब पुलिस की कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
