जमशेदपुर : शहर के एग्रिको इलाके में रविवार को तेज रफ्तार हाइवा डंपर ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। भीषण सड़क हादसे में पिता और पुत्र की दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए. बताया जा रहा है कि हाइवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसकी चपेट में आने के बाद बच्चा करीब 50 मीटर तक घसीटता चला गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई. सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने हादसे के कारणों के साथ-साथ दुर्घटना में शामिल भारी वाहन की आवाजाही और अन्य परिस्थितियों की भी पड़ताल शुरू की है।

नो-एंट्री में हाइवा कैसे पहुंचा?……
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल नो-एंट्री व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर इलाके में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक थी, तो आखिर हाइवा वहां तक पहुंचा कैसे?
क्या नो-एंट्री की निगरानी में चूक हुई?
क्या भारी वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने वाली व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है?
और अगर नो-एंट्री लागू थी, तो नियम तोड़कर भारी वाहन सड़क पर कैसे दौड़ रहा था?
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शहर की सड़कों पर भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी को लेकर गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। हादसा किस परिस्थिति में हुआ, हाइवा की रफ्तार कितनी थी और नो-एंट्री के दौरान भारी वाहन उस इलाके में कैसे पहुंचा, इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे. लेकिन एग्रिको का यह हादसा एक बार फिर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और भारी वाहनों की निगरानी पर बड़ा सवाल छोड़ गया है—आखिर नियमों की जिम्मेदारी कौन निभाएगा और लापरवाही की कीमत कब तक आम लोगों को चुकानी पड़ेगी?
