रांची : झारखंड की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में जहां एक सीट पर झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, वहीं दूसरी सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के बीच कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विधानसभा के 81 विधायकों का प्रत्येक वोट निर्णायक भूमिका निभाएगा।



दूसरी सीट पर टिकी राजनीतिक नजरें…..
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहली सीट का परिणाम लगभग स्पष्ट है, लेकिन दूसरी सीट पर मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का हो सकता है। यही वजह है कि मतदान से पहले सत्ता पक्ष और एनडीए दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। रांची से लेकर दिल्ली तक इस चुनाव पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
होटल राजनीति के जरिए विधायकों को साधने की कोशिश…..
मतदान से पहले एनडीए ने अपने 24 विधायकों को होटल रेडिसन ब्लू में एकत्र कर शक्ति प्रदर्शन किया। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन और कांग्रेस के विधायक होटल बीएनआर में जुटे, जहां मतदान रणनीति को अंतिम रूप दिया गया. दोनों पक्षों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई विधायक पार्टी लाइन से अलग मतदान न करे। इसके लिए विधायकों को मतदान प्रक्रिया की विशेष जानकारी दी गई और मॉक पोल के माध्यम से प्रशिक्षण भी कराया गया। नेताओं की चिंता इस बात को लेकर है कि एक भी वोट रद्द होने की स्थिति में पूरे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
28 वोट का आंकड़ा और दूसरी वरीयता की अहमियत……
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों का कोटा आवश्यक है। वर्तमान में झामुमो नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास 24 विधायकों का समर्थन है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार दूसरी सीट के चुनाव में पहली वरीयता के वोटों के साथ-साथ दूसरी वरीयता के मत भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए हर एक वोट की अहमियत बढ़ गई है।
क्रॉस वोटिंग की आशंका से बढ़ी बेचैनी…..
राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग होती है। दलगत विधायकों को अपना मतपत्र पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं करने या गलत तरीके से मतदान करने पर वोट रद्द हो सकता है. इसी वजह से सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को लगातार दिशा-निर्देश दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि यदि किसी भी खेमे का एक विधायक भी रणनीति से अलग मतदान करता है, तो चुनाव परिणाम अप्रत्याशित रूप ले सकता है।
शाम तक आ सकता है नतीजा….
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होने की संभावना है। यदि किसी प्रकार की तकनीकी बाधा नहीं आती है तो देर शाम तक दोनों सीटों के परिणाम घोषित किए जा सकते हैं. राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव केवल दो राज्यसभा सांसदों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके नतीजे झारखंड की वर्तमान राजनीतिक ताकत, गठबंधन की एकजुटता और दलों की रणनीतिक क्षमता की भी परीक्षा माने जा रहे हैं। दूसरी सीट पर होने वाला मुकाबला पूरे चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।



