जमशेदपुर : जहां जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी होनी चाहिए… वहां अगर मौत इतनी आसान हो जाए, तो सवाल उठना लाज़िमी है। कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल में बीते दिन शुक्रवार (20 मार्च) की सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह करीब 4 बजे, जब अस्पताल सन्नाटे में डूबा था, उसी दौरान एक युवक ने ऊंचाई से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। बताया जा रहा है कि युवक बीमारी से जूझ रहा था, लेकिन सवाल ये है—क्या वह सिर्फ बीमारी से हारा… या सिस्टम की लापरवाही ने उसे इस कगार तक पहुंचा दिया?
सुरक्षा पर बड़ा सवाल…….
करीब 30 एकड़ में फैले और लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बने इस हाई-टेक अस्पताल की हकीकत चौंकाने वाली है।
👉 7 मंज़िल ऊंची इमारत
👉 हर फ्लोर पर खुला किनारा
👉 और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ 3 फीट ऊंचा कांच का स्लाइडर
ना मजबूत ग्रिल… ना कोई सेकेंडरी बैरियर… ना ही ऐसी कोई व्यवस्था जो मरीजों को इस तरह के खतरनाक कदम से रोक सके. एक आम घर में भी बालकनी पर ग्रिल लगाई जाती है, लेकिन यहां ऐसे मरीज रखे जा रहे हैं जो मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं—फिर भी सुरक्षा के बुनियादी इंतज़ाम तक नहीं!
सिस्टम पर सीधा सवाल…..
क्या अस्पताल का डिजाइन मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था… या उन्हें खतरे के करीब ले जाने के लिए?
क्या इंजीनियरिंग में सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया?
क्या बजट में कटौती का असर सुरक्षा पर पड़ा?
क्या अधिकारियों ने सिर्फ कागजों पर “सब ठीक” दिखाकर जिम्मेदारी पूरी कर ली?
पहले भी उठे हैं सवाल, लेकिन कार्रवाई शून्य यह कोई पहली घटना नहीं है। हर बार जांच की घोषणा होती है, कमेटी बनाई जाती है, रिपोर्ट तैयार होती है. लेकिन नतीजा सब कुछ फाइलों में दबकर रह जाता है।
बड़ा खतरा अभी भी बरकरार…….
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस खामी के कारण यह घटना हुई, वह आज भी जस की तस मौजूद है। वही 3 फीट का कांच… वही खुला किनारा… और वही अगली घटना का इंतजार करता खतरा। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह अस्पताल इलाज का केंद्र नहीं… बल्कि हादसों का अड्डा बन सकता है।
400 करोड़ खर्च करना आसान है. लेकिन एक जिंदगी की कीमत समझना शायद सिस्टम के लिए अभी भी मुश्किल है।
जब सुरक्षा नहीं… तो विकास किस काम का? और जब जिम्मेदार लोग चुप हों… तो हर मंज़िल मौत का दरवाज़ा बन जाती है। याद रखिए चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है… और सवाल ही सबसे बड़ा हथियार!
