जमशेदपुर : मतदाता सूची में कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम शामिल होने को लेकर अब तक सियासी बयानबाजी होती रही है। इसी बीच जमशेदपुर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान तीन अफगानिस्तानी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए जाने का मामला सामने आया है। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग में हड़कंप मच गया है. जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान आसिल खान, मो. असलम और मो. इब्राहिम के नाम सामने आए। प्रारंभिक जांच में तीनों के नाम पहले से ही प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज थे। दस्तावेजों और पासपोर्ट के मिलान के दौरान उनके विदेशी नागरिक होने की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान….
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया है। निर्वाचन आयोग की ओर से तीनों व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने तथा मामले में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पार्ट नंबर 286 में दर्ज थे नाम…..
जानकारी के अनुसार जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या (पार्ट) 286 में तीनों के नाम दर्ज थे। मतदाता सूची में सीरियल नंबर 30, 31 और 33 पर इनके नाम दर्ज पाए गए. बताया गया है कि एसआईआर के तहत चल रही न्यूमरेशन प्रक्रिया के दौरान इन लोगों ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में भी शामिल हो गए। हालांकि, बाद में दस्तावेजों के सत्यापन और मिलान के दौरान सामने आई विसंगतियों के आधार पर निर्वाचन विभाग ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया।
दस्तावेजों की जांच के बाद खुला मामला……
निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के मिलान में तीनों मामलों पर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में उनके अफगानिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि होने के बाद मामला उच्च स्तर तक पहुंचा. निर्वाचन विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए और इसके पीछे किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ. मामले ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईआर के दौरान सामने आए इस प्रकरण के बाद निर्वाचन विभाग द्वारा सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किए जाने की संभावना है।


