22 साल तक पुलिस की व्यस्त जिम्मेदारियों में दबा रहा संगीत का शौक, छह साल की शास्त्रीय संगीत की साधना ने दिया नया मुकाम; ‘जोतावाली शेरावाली मां’ से एक बार फिर गायकी को लेकर चर्चा में आए पूर्व पुलिस महानिदेशक
पटना : वर्दी पहनकर अपराधियों से मुकाबला करने और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज अब अपनी आवाज के जरिए भक्ति और संगीत की दुनिया में नई पहचान बना रहे हैं। देश की प्रतिष्ठित म्यूजिक कंपनी T-Series ने उनकी आवाज में देवी मां को समर्पित भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ रिलीज किया है। इस गीत के रिलीज होने के बाद आलोक राज एक बार फिर अपनी गायकी को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि पुलिस सेवा की करीब तीन दशक लंबी व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने संगीत के प्रति अपने लगाव को जीवित रखा और सेवानिवृत्ति के बाद इस साधना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
आलोक राज की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो व्यस्त दिनचर्या और जिम्मेदारियों के बीच अपने शौक और प्रतिभा को पीछे छोड़ देते हैं। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही उन्हें फिल्मी गीत गाने का शौक था, लेकिन 20 अगस्त 1989 को आईपीएस सेवा में आने के बाद पुलिस की जिम्मेदारियों ने उन्हें संगीत से कुछ दूर कर दिया। करीब 22 वर्षों तक पुलिस सेवा में व्यस्त रहने के बाद दिसंबर 2011 में उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेने का निर्णय किया। संगीत गुरु अशोक कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में उन्होंने करीब छह वर्षों तक नियमित रियाज और साधना की। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि वर्ष 2017 में T-Series के बैनर तले उनका पहला म्यूजिक एल्बम ‘साईं रचना’ रिलीज हुआ।
### नीरज के गीतों से कबीर के भजनों तक को दी आवाज….
आलोक राज ने अपनी गायकी के जरिए साहित्य और संगीत की दुनिया के कई प्रतिष्ठित रचनाकारों की रचनाओं को स्वर दिया है। पद्मभूषण से सम्मानित कवि गोपालदास नीरज के गीतों पर आधारित एल्बम तैयार करने के लिए उन्होंने स्वयं नीरज से गीतों के अधिकार प्राप्त किए थे। इसके अलावा मशहूर कवि एवं शायर दुष्यंत कुमार की गजलों को भी अपनी आवाज दी। कबीर के भजनों पर आधारित एल्बम में उनकी गायकी सुनने को मिली। भगवान शिव को समर्पित उनका भजन ‘ये भोला सबसे बड़ा है’ भी श्रोताओं के बीच काफी चर्चित रहा। वहीं, ‘जय अंबे मां जय जय अंबे मां’ और ‘वल्कल ना ओढ़ री’ जैसे गीतों में भी उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा है।
### 1989 बैच के IPS अधिकारी, कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का किया नेतृत्व….
मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले आलोक राज 1989 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। एकीकृत बिहार के दौरान रांची, गुमला, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में सेवाएं दीं। बाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में डीआईजी और आईजी के पद पर भी कार्य किया. वर्ष 2004 से 2011 के बीच CRPF में रहते हुए उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटना में एएसपी रहते हुए एक पुलिस मुठभेड़ में चार अपराधियों के मारे जाने के मामले में उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला था। वहीं, पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा नैनो प्लांट के विरोध में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान CRPF के आईजी के रूप में उन्होंने कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उस दौर में कानून-व्यवस्था बहाल करने की दिशा में उनकी भूमिका की काफी चर्चा हुई थी।
### 105 दिनों तक संभाली बिहार के DGP की जिम्मेदारी…….
30 अगस्त 2024 को आलोक राज ने बिहार के पुलिस महानिदेशक का पदभार संभाला था। तत्कालीन डीजीपी आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, उनका कार्यकाल करीब 105 दिनों का रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने बिहार पुलिस की कार्यशैली और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की थीं. उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों को ‘6 स’ के सिद्धांत पर काम करने का मंत्र दिया था। इसमें समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्तिशाली होना, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल शामिल थे। उनका जोर पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने, पीड़ितों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने, अपराधियों में कानून का भय कायम करने और मामलों की जांच समय पर पूरी कर त्वरित सुनवाई के जरिए दोषियों को सजा दिलाने पर रहा। बाद में उन्होंने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। 31 दिसंबर 2025 को वह पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए।
### तीन बार राष्ट्रपति पदक से हो चुके हैं सम्मानित……
आलोक राज की उपलब्धियों में शैक्षणिक उत्कृष्टता और पुलिस सेवा में उल्लेखनीय योगदान दोनों शामिल हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से भूगर्भशास्त्र में एमएससी की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक से नवाजा गया। वर्ष 2019 में उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए उन्हें अटल रत्न सम्मान भी मिला. पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम में वन माफिया और हजारीबाग में कोयला माफिया तथा नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाए। इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। बिहार पुलिस में विशेष शाखा, सीआईडी और विधि-व्यवस्था के एडीजी सहित कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पुलिस प्रशिक्षण और बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
### बड़े मंचों पर भी बिखेर चुके हैं गायकी का जलवा……
आलोक राज की संगीत साधना केवल स्टूडियो और एल्बम तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने बिहार दिवस, सोनपुर के हरिहरक्षेत्र महोत्सव, बोधगया महोत्सव, राजगीर महोत्सव, पावापुरी महोत्सव और ताज महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी गायकी की प्रस्तुति दी है। आकाशवाणी, दूरदर्शन और डीडी उर्दू के कार्यक्रमों में भी उनकी आवाज गूंज चुकी है. उनका मानना है कि संगीत इंसान के व्यक्तित्व को निखारने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने का सशक्त माध्यम है। विशेष रूप से पुलिस जैसी तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण सेवा में कला और संगीत व्यक्ति को मानसिक रूप से संतुलित रखने में मदद करते हैं। शायद यही वजह है कि कठिन प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने भीतर के कलाकार को कभी मरने नहीं दिया।
### नए भक्ति गीत में खुद भी आए नजर…….
T-Series Bhakti Sagar के बैनर तले रिलीज हुए नए भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ में आलोक राज ने अपनी आवाज देने के साथ-साथ अभिनय भी किया है। गीत का संगीत निर्देशन दिलीप सेन-समीर सेन ने किया है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। इस भक्ति गीत के जरिए आलोक राज ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिभा किसी पद, पेशे या उम्र की मोहताज नहीं होती. कभी खाकी वर्दी में अपराधियों के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले आलोक राज अब सुरों के जरिए मां की आराधना कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा बताती है कि इंसान के भीतर छिपी प्रतिभा को यदि अवसर और साधना मिले, तो जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर एक नई शुरुआत की जा सकती है।




