सौरभ कुमार, जादूगोड़ा…..
गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांव से लेकर शहर तक आम के अचार और मुरब्बे की खुशबू फैलने लगी है। घरों में सालभर के लिए अचार बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, वहीं बाजारों में कच्चे आम की मांग अचानक बढ़ गई है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने में कलकापुर तेतला गांव निवासी चुनूँ महाली अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो रोजाना मेहनत कर जादूगोड़ा और आसपास के बाजारों में लोगों तक ताजा कच्चा आम पहुंचा रहे हैं।



पिछले पांच वर्षों से इस काम से जुड़े चुनूँ महाली सुबह-सुबह बाजार पहुंचकर ग्राहकों की जरूरत के अनुसार आम काटकर बेचते हैं। कटे हुए आम ₹30 में उपलब्ध कराते हैं, जबकि पूरा कच्चा आम ₹20 प्रति किलो की दर से बेचते हैं। ग्राहक जिस आकार में आम चाहते हैं, उसी हिसाब से वे धैर्यपूर्वक आम काटकर तैयार करते हैं।
गर्मी के दिनों में आम के अचार और मुरब्बे का चलन बढ़ने से बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पारंपरिक मसालों से आम का अचार तैयार कर रही हैं, जबकि कई परिवार मीठा मुरब्बा बनाकर गर्मी के स्वाद का आनंद ले रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों कच्चे आम की मांग लगातार बढ़ रही है।
चुनूँ महाली बताते हैं कि उनके पास खास तौर पर अचार और मुरब्बा बनाने के लिए ग्राहक पहुंचते हैं। वे हमेशा ताजा और अच्छी गुणवत्ता का आम उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं। कई ग्राहक ऐसे हैं जो हर साल उन्हीं से आम खरीदना पसंद करते हैं।
वे जादूगोड़ा बाजार के अलावा आसपास के ग्रामीण हाटों में भी आम बेचते हैं। यूसीआईएल कॉलोनी परिसर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में गुरुवार और रविवार को उनकी दुकान सजती है। अन्य दिनों में भी वे पेड़ के नीचे बैठकर आम काटते और बेचते नजर आते हैं।
आम का अचार केवल स्वाद का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय घरों की परंपरा और यादों से भी जुड़ा हुआ है। आधुनिक दौर में भी गर्मियों में अचार बनाने की परंपरा कायम है। ऐसे में चुनूँ महाली जैसे मेहनतकश विक्रेता लोगों तक इस पारंपरिक स्वाद को पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।



