जमशेदपुर : ईएसआईसी से संबंधित एक मामले में शिकायतकर्ता द्वारा अधिकारियों के कामकाज को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता ने सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर सचित कुमार एवं सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर रवि शंकर पर पद के कथित दुरुपयोग तथा उसे दबाव में लेने और हतोत्साहित करने का प्रयास किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने अपने अधिकारों और जनहित से जुड़े सवालों को लेकर संबंधित स्तर पर शिकायतें एवं आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद उसे एक अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया। शिकायतकर्ता इसे अपनी शिकायतों और सवालों को लेकर उस पर दबाव बनाने अथवा उसे हतोत्साहित करने की कोशिश के रूप में देख रहा है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि लोकतंत्र सवेरा द्वारा नहीं की गई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित दस्तावेजों, शिकायतों, नोटिस तथा दोनों पक्षों के बयानों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने उठाए जवाबदेही से जुड़े सवाल……
शिकायतकर्ता का कहना है कि किसी सरकारी विभाग अथवा अधिकारी के कामकाज को लेकर सवाल उठाना और संबंधित सक्षम मंच पर शिकायत करना नागरिक के अधिकारों का हिस्सा है। उसका आरोप है कि यदि शिकायतकर्ता को ही कानूनी नोटिस अथवा किसी अन्य माध्यम से भयभीत या हतोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है, तो इससे शिकायत निवारण और जवाबदेही की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. शिकायतकर्ता ने यह भी जानकारी दी है कि मामले को लेकर Ministry of Labour & Employment, Central Vigilance Commission (CVC), Prime Minister’s Office (PMO) तथा National Human Rights Commission (NHRC) सहित संबंधित सक्षम मंचों पर शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग……
शिकायतकर्ता की ओर से मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या किसी अधिकारी ने अपने पद अथवा प्रभाव का इस्तेमाल शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने या उसे शिकायत वापस लेने अथवा सवाल उठाने से रोकने के लिए किया. मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि “अधिकारी कोई भी हो, कानून और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकता।” उसका आग्रह है कि शिकायतों की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर हो तथा किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न किया जाए।
लोकतंत्र सवेरा का स्पष्ट पक्ष…
लोकतंत्र सवेरा स्पष्ट करता है कि उपरोक्त समाचार शिकायतकर्ता/संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रकाशित किया जा रहा है। समाचार में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि लोकतंत्र सवेरा द्वारा नहीं की गई है। इस मामले में लोकतंत्र सवेरा का किसी व्यक्ति, अधिकारी, संस्था अथवा पक्ष के प्रति कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक स्वार्थ नहीं है।
लोकतंत्र सवेरा किसी भी आरोप को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। हमारा उद्देश्य संबंधित मामले को सार्वजनिक विमर्श और जवाबदेही के संदर्भ में सामने रखना है। यदि मामले से जुड़े दूसरे पक्ष—संबंधित अधिकारी, ईएसआईसी अथवा कोई अन्य संबंधित व्यक्ति/संस्था—की ओर से अपना पक्ष, स्पष्टीकरण या तथ्यात्मक बयान उपलब्ध कराया जाता है, तो उसे भी नियमानुसार और उचित स्थान देते हुए प्रकाशित किया जाएगा।
मामले की वास्तविक तस्वीर जांच और दोनों पक्षों के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. जनता की आवाज को सुना जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी भावना है। सवालों का जवाब तथ्यों और जांच के माध्यम से ही सामने आना चाहिए।
