जमशेदपुर : शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि के अवसर पर आज सनातन धर्म की परंपरा के अनुरूप पूजा-अर्चना कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान देश की आन, बान और शान तिरंगा शहीद निर्मल महतो को समर्पित करते हुए उनके विचारों और संघर्षों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया. कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि शहीद निर्मल महतो केवल झारखंड की राजनीति के एक नेता नहीं, बल्कि राज्य के शोषित, वंचित और पिछली पंक्ति में खड़े लोगों की आवाज थे। उन्होंने आदिवासी, दलित और समाज के कमजोर वर्गों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया और उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती प्रदान की।

उन्होंने कहा कि शहीद निर्मल महतो के विचार और संघर्ष आज भी झारखंड के लिए प्रासंगिक हैं। जरूरत है कि उनके मार्गदर्शन और आदर्शों को केवल पुण्यतिथि के दिन याद करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारा जाए. कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि प्रत्येक वर्ष पुण्यतिथि के अवसर पर नेताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि एवं माल्यार्पण किया जाता है, लेकिन शहीद निर्मल महतो को राष्ट्र स्तर पर सम्मान दिलाने की मांग को अपेक्षित मजबूती से नहीं उठाया गया है। इसी दिशा में आज से एक नई पहल शुरू करने का संकल्प लिया गया है।
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि झारखंड का प्रत्येक बच्चा, प्रत्येक परिवार और समाज का हर वर्ग शहीद निर्मल महतो के विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाने की इस मुहिम से जुड़ेगा तथा उन्हें उचित राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की आवाज को बुलंद करेगा. उन्होंने कहा कि शहीद निर्मल महतो के सपनों का झारखंड तभी बनेगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान, अधिकार और न्याय के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाई जाएगी।
