नोएडा : कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली IPS अधिकारी प्रीति यादव ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इस कहावत को सच कर दिखाया है। पुलिस विभाग में कांस्टेबल रहे पिता की बेटी प्रीति आज नोएडा जोन-1 की पहली महिला पुलिस उपायुक्त (DCP) बनकर चर्चा में हैं। उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. प्रीति यादव के पिता मुकेश यादव ने कांस्टेबल के रूप में पुलिस सेवा शुरू की और बाद में सहायक अवर निरीक्षक (ASI) के पद तक पहुंचे। पिता को वर्दी में अपनी जिम्मेदारियां निभाते देखकर प्रीति के मन में भी पुलिस सेवा में जाने का सपना पनपा। उन्होंने बचपन से ही सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया था।
पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल…..
प्रीति पढ़ाई में भी शुरू से मेधावी रही हैं। उन्होंने 12वीं की परीक्षा ह्यूमैनिटीज विषय से 96.2 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद भूगोल विषय में बीए ऑनर्स किया और विश्वविद्यालय में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने UPSC की तैयारी का निर्णय लिया और अपने लक्ष्य के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीच में छोड़ दी।
दूसरे प्रयास में मिली UPSC में सफलता……
UPSC सिविल सेवा परीक्षा के पहले प्रयास में प्रीति ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में 21 अंकों से चूक गईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में वर्ष 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 466 हासिल कर IPS के लिए चयनित हुईं। वह उत्तर प्रदेश कैडर की 2019 बैच की IPS अधिकारी हैं।
सहारनपुर से नोएडा तक का सफर……
प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली तैनाती सहारनपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और पुलिस-जनता के बीच बेहतर संवाद जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। सहारनपुर में पुलिस लाइन के पुराने कैफे को नया रूप देकर ‘बेलआउट-द पुलिस कैफे’ शुरू कराने की पहल भी की, जिसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना था।
अब गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें नोएडा जोन-1 का DCP नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह इस जोन की पहली महिला DCP बन गई हैं. कांस्टेबल की बेटी से IPS अधिकारी और फिर नोएडा जोन-1 की पहली महिला DCP तक का उनका सफर बताता है कि सफलता विरासत में नहीं मिलती, बल्कि उसे मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति से हासिल किया जाता है। प्रीति यादव की कहानी आज उन बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलने का जुनून रखते हैं।




