जमशेदपुर : दीवाली के अवसर पर झारखंड की पूर्व सांसद सुमन महतो ने स्थानीय कुम्हारों के बीच पहुंचकर उनके साथ खुशियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक चाक चलाकर खुद मिट्टी के दीये बनाए और कुम्हारों की मेहनत व पुश्तैनी कला की सराहना की। सुमन महतो ने कहा कि मिट्टी के दीये केवल रोशनी का माध्यम नहीं, बल्कि कुम्हार परिवारों की आजीविका और उम्मीदों का प्रतीक हैं। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि विदेशी झालरों और कृत्रिम लाइटों के बजाय स्थानीय कुम्हारों के हाथों से बने मिट्टी के दीये खरीदें।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर ही कुम्हारों की कला को संरक्षित किया जा सकता है और उनके घरों में भी खुशियों की दीवाली लाई जा सकती है। इस पहल के जरिए उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया।




