हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना के लिए सबसे शुभ माना गया है। बुधवार को पड़ रही कार्तिक पूर्णिमा 2025 को लेकर पूरे देश में धार्मिक उत्साह चरम पर है। इस दिन किए गए स्नान, दान और दीपदान से सौ गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।

तीर्थराज पुष्कर में उमड़ा आस्था का सागर…..
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान स्थित तीर्थराज पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी है। हल्की ठंड और सर्द हवाओं के बीच लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और महिलाएं-पुरुष पवित्र सरोवर में स्नान के लिए पहुंचे हैं। पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय ब्रह्मा देव’ के जयकारों से गूंज उठा।
पुष्कर निवासी शशिकांत शर्मा के अनुसार, इस दिन सरोवर में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर तीर्थ में पूजा-अर्चना की थी।
क्या है कार्तिक पूर्णिमा की पौराणिक मान्यता…..
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को एक कमल पुष्प दिया था, जिसे पृथ्वी पर गिराने पर वहीं पुष्कर तीर्थ का निर्माण हुआ। यही कारण है कि इस दिन स्नान और दान को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करें दान….
धर्मग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया दान और सेवा ईश्वर की विशेष कृपा दिलाते हैं।
अन्नदान : गेहूं, चावल, दाल, आटा और चीनी का दान करें। इससे घर में अन्न का भंडार भरा रहता है।
तिल, गुड़ और घी का दान : इन तीनों चीजों का दान स्वास्थ्य, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है।
कपड़ों और कंबलों का दान : ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को गर्म कपड़े या कंबल दान करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
दीपदान : घर या मंदिर के पास दीप जलाकर जीवन के अंधकार को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
साधु-संतों की आरती और दीपोत्सव से गूंजे घाट……
पुष्कर सरोवर के घाटों पर साधु-संतों ने स्नान, आरती और दीपदान के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। चारों ओर गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार, भजन और कीर्तन से वातावरण भक्ति में सराबोर हो गया। हजारों दीपों से जगमगाता पुष्कर इस अवसर पर आध्यात्मिक आस्था और हिंदू संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया।

