जमशेदपुर : निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल और आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने हाल में प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आयोग के भीतर कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर दर्ज की गई आपत्तियों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की शिकायत या आशंका का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ चुनावों को लेकर विपक्षी दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के सवाल उठाए हैं। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और आवश्यक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को देखना जरूरी है. प्रदेश प्रवक्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 का भी उल्लेख किया और निर्वाचन आयुक्तों को प्राप्त कानूनी संरक्षण पर सार्वजनिक बहस की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता लोकतंत्र में महत्वपूर्ण है।
आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण……
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट किया है कि आयोग द्वारा लिए गए फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। आयोग के अनुसार, आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय या टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और उन्हें अंतिम निर्णय से अलग संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
मतदाता सूची के संबंध में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के लिए निर्धारित कानूनी प्रावधान और प्रक्रिया लागू होती है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया के तहत दावा, आपत्ति या सुधार का अवसर भी मिलता है. राजनीतिक बयानबाजी के बीच फिलहाल मुख्य मुद्दा निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग पर जनता के भरोसे से जुड़ा है। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ निर्वाचन आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण और उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
