जमशेदपुर : आदिवासियों की मूल पहचान और धार्मिक अस्मिता के मुद्दे पर आज लौहनगरी जमशेदपुर का साकची स्थित बिरसा चौक विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। समस्त आदिवासी समाज के बैनर तले आक्रोशित लोगों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी का पुतला दहन किया।



विरोध की मुख्य वजह: “हिंदू” और “वनवासी” संबोधन पर आपत्ति
यह पूरा विवाद बीते 24 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति संस्कृति समागम’ कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ।
- आरोप: कार्यक्रम के दौरान आदिवासियों को “हिन्दू” एवं “वनवासी” कहकर संबोधित किया गया था।
- समाज का रुख: इस बयान के बाद झारखंड समेत देश भर के विभिन्न आदिवासी संगठनों में भारी आक्रोश है। समाज का स्पष्ट कहना है कि आदिवासियों की अपनी एक अलग विशिष्ट पहचान, समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति-पूजक धर्म है, जिसे जबरन मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
“हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं! बीजेपी और आरएसएस मिलकर आदिवासियों के ‘सरना धर्म कोड’ की मांग को दबाना चाहते हैं और हमारी मूल पहचान को समाप्त करने की साजिश रच रहे हैं।”
— आदिवासी समाज के प्रतिनिधि
गूंजे नारे: पहचान और सम्मान की लड़ाई
प्रदर्शन के दौरान बिरसा चौक पर आदिवासी समाज के लोगों ने एक स्वर में अपनी मांगों को बुलंद किया और जोरदार नारेबाजी की:
- “हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं!”
- “सरना धर्म, आदिवासी पहचान और संस्कृति का सम्मान करो!”
प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य व सामाजिक कार्यकर्ता
इस विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम में मांझी परगाना महाल के पदाधिकारियों सहित क्षेत्र के कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
प्रमुख उपस्थित लोग
• दुर्गा चरण मुर्मू • दिनकर कच्छप • उपेंद्र बानरा
• सन्नी समाद • बाबू कुजूर • दुर्गी समाद
• हिताई सुंडी • करन उग्र सुंडी • कृष्णा सोरेन
• महावीर कर्मकार • अजय सिंह जमुदा • कुंदन बानरा
• अखिल कच्छप • सुनील मुर्मु • रुकमानी टुडु
इसके अलावा आंदोलन में बानरा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग भारी संख्या में उपस्थित रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों की पहचान के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन आगे और उग्र रूप लेगा।



