चाईबासा : झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाके से बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। चाईबासा जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये का इनामी कुख्यात नक्सली पतिराम माझी उर्फ अनल दा मारा गया। इस मुठभेड़ में उसके साथ 10 अन्य नक्सलियों को भी सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया।



गुप्त सूचना के बाद चला बड़ा ऑपरेशन……
सुरक्षा एजेंसियों को सारंडा इलाके में नक्सलियों की भारी मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
लंबे समय तक चली गोलीबारी, चारों ओर से घिरे नक्सली…..
नक्सलियों की फायरिंग का सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों ओर से काफी देर तक भीषण गोलीबारी होती रही। रणनीतिक घेराबंदी के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया। अंततः इस मुठभेड़ में 11 नक्सली ढेर कर दिए गए।
भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद…..
मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से AK-47, इंसास राइफल, SLR, भारी मात्रा में गोलियां और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मारे गए नक्सली लंबे समय से इस इलाके में सक्रिय थे और बड़ी वारदातों की तैयारी में जुटे थे।
माओवादी संगठन को तगड़ा झटका……
मारा गया कुख्यात नक्सली अनल दा भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी का सदस्य था। उसे संगठन का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था और हथियारों की सप्लाई में उसकी अहम भूमिका थी। अनल दा उर्फ तूफान, पतिराम मांझी, पतिराम मरांडी, रमेश झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित झरहाबाले गांव का रहने वाला था। उसके पिता का नाम टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी है। वह कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा था।
इलाके में हाई अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी…..
मुठभेड़ के बाद पूरे सारंडा इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी नक्सली बचकर न निकल पाए। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है और विस्तृत जानकारी बाद में दी जाएगी।
सुरक्षाबलों की ऐतिहासिक जीत……
इस बड़ी कार्रवाई से पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी नेटवर्क को करारा झटका लगा है। सुरक्षाबलों की इस सफलता को नक्सल विरोधी अभियान में मील का पत्थर माना जा रहा है।
