गुमला के बेदवाकोना गांव की तस्वीर ने खोली ग्रामीण सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत
गुमला। जिले के रायडीह प्रखंड स्थित बेदवाकोना गांव से सामने आई एक तस्वीर ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क की समुचित सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों को एक गर्भवती महिला को बहंगी (टोकरी) पर बैठाकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव तक बेहतर सड़क नहीं होने के कारण आए दिन लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में होती है। बारिश के मौसम में रास्तों की स्थिति और खराब हो जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार गांवों के विकास और बेहतर सड़क एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बेदवाकोना गांव की यह तस्वीर बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बताया गया है कि ग्रामीण विकास विभाग का बजट 12,346 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग का बजट 7,990 करोड़ रुपये है। ऐसे में सवाल उठता है कि बड़े बजट के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लोगों को आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
बेदवाकोना की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर व्यापक चिंता को सामने लाती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
