प्रख्यात शिक्षाविद कुंदन कुमार सिंह की अंतिम यात्रा में तीनों बेटियों ने दिया कंधा, बड़ी बेटी ने वैदिक रीति-रिवाज से दी मुखाग्नि… मऊभंडार मुक्तिधाम से समाज को मिला बदलाव का संदेश
घाटशिला/मुसाबनी : समाज में वर्षों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए सोमवार को मऊभंडार मुक्तिधाम से एक ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। क्षेत्र के प्रख्यात शिक्षाविद एवं जीसीजेडी (गिरिश चंद्र झुरो देवी) उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज के संस्थापक स्वर्गीय कुंदन कुमार सिंह की अंतिम यात्रा में उनकी तीनों बेटियों ने अर्थी को कंधा देकर समाज के सामने नई मिसाल पेश की। इतना ही नहीं, बड़ी बेटी पूनम सिंह ने वैदिक विधि-विधान के साथ पिता को मुखाग्नि देकर उनकी अंतिम इच्छा भी पूरी की।

हजारों लोगों की मौजूदगी में निकली अंतिम यात्रा भावनाओं से भरी रही। हर किसी की निगाहें उन बेटियों पर थीं, जिन्होंने अपने पिता के प्रति कर्तव्य निभाते हुए यह साबित कर दिया कि संस्कार और जिम्मेदारी का कोई लिंग नहीं होता।
परिजनों ने बताया कि स्वर्गीय कुंदन कुमार सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उनकी बेटियां ही उन्हें अंतिम विदाई दें। पिता की इसी इच्छा का सम्मान करते हुए बड़ी बेटी पूनम सिंह, शिक्षिका अल्पना सिंह और हाल ही में बिहार सरकार में सप्लाई इंस्पेक्टर पद पर चयनित ज्योति सिंह ने अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद श्मशान घाट पर बड़ी बेटी पूनम सिंह ने पूरे वैदिक रीति-रिवाज से मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाईं।
इस भावुक दृश्य को देखकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने कहा कि जब आज बेटियां हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं, तो अपने माता-पिता की अंतिम विदाई का अधिकार भी उन्हें समान रूप से मिलना चाहिए। यह घटना समाज में बेटियों के सम्मान और समान अधिकार का सशक्त संदेश बनकर सामने आई।
स्कूल परिसर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि…….
अंतिम संस्कार से पूर्व मुसाबनी स्थित गिरिश चंद्र झुरो देवी स्कूल परिसर में स्वर्गीय कुंदन कुमार सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। यहां आयोजित शोकसभा में शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।
