लोकतंत्र सवेरा : झारखंड के कई ब्लड बैंकों में तय मानकों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे मरीजों की जान को खतरा पैदा हो गया है। राज्य के कुल 82 ब्लड बैंकों में से 45 का लाइसेंस नवीनीकरण के बिना ही संचालन जारी है, कई ब्लड बैंक चालान पर चल रहे हैं। इससे खून की गुणवत्ता और सुरक्षा में गंभीर लापरवाही हो रही है।



हाल ही में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया है जहां बिना लाइसेंस वाले ब्लड बैंक से 5 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव खून देने का खुलासा हुआ। मामले की जांच के बाद कई स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित किया गया और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जा रहा है। इस घटना के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेकर स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा है।
राज्य में ब्लड बैंक संचालन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपायुक्त और स्वास्थ्य विभाग ने कड़े निरीक्षण और ऑडिट की मांग की है। सभी ब्लड बैंकों को मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने, तकनीकी रूप से सक्षम बनाने, और आधुनिक जांच मशीन जैसे एनएटी की स्थापना करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि रक्त की जांच अधिक सटीक और सुरक्षित हो सके।
इस तरह की लापरवाही से बचने के लिए, कई ब्लड बैंक लाइसेंस की आवश्यकता को लेकर निरीक्षण किए जाते हैं और जो ब्लड बैंक नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें बंद या चालान पर चलाने की कार्रवाई होती है। झारखंड के ब्लड बैंक संचालन में सुधार व नियमन की सख्ती की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि मरीजों की जान सुरक्षित रह सके और रक्त संक्रमण जैसी घातक घटनाओं को रोका जा सके।
संकट की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और न्यायालय इस मामले पर सख्त नजर बनाए हुए हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।
लाइसेंस नवीनीकरण में देरी के मुख्य कारण क्या रहे
लाइसेंस नवीनीकरण में देरी के मुख्य कारण……
- प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और कागजी कार्रवाई की जटिलताएँ, जैसे फीस का ऑनलाइन कटने के बावजूद नवीनीकरण न होना, दस्तावेज़ों की अदूरदर्शिता और सत्यापन में देरी।
- कुछ जगहों पर, पुराने नियमों और शैक्षणिक योग्यता संबंधित शर्तों के कारण नवीनीकरण प्रक्रिया ठप रह जाती है।
- विभागीय लापरवाही और आरटीओ कार्यालयों में आवेदन के अत्यधिक भीड़बाजियों की वजह से प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
- तकनीकी संसाधनों की कमी और आवश्यक जांच जैसे आधुनिक टेस्ट न होना या सुविधा उपलब्ध न कराना।
- एक्सपायरी के बाद समय पर आवेदन न करने पर जुर्माना राशि और फिर से टेस्ट देने की आवश्यकता जो आवेदनकर्ताओं को रोकती है।
- विभागों द्वारा लाइसेंस नवीनीकरण की समय सीमा पर कड़ी निगरानी न रखना और सूचनाओं का सही तरीके से प्रबंधन न होना।
