जमशेदपुर : जमशेदपुर में बिना कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के निर्मित हजारों भवनों के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में अब सीधे संबंधित प्रमुख बिल्डरों को प्रतिवादी बनाया जाएगा। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद शहर के रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।



मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि हजारों फ्लैट मालिकों या निवासियों को पक्षकार बनाने के बजाय अवैध निर्माण कराने वाले प्रमुख बिल्डरों को प्रतिवादी बनाकर नई जनहित याचिका दाखिल की जाए। अदालत ने वर्तमान जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति भी प्रदान कर दी।
जेएनएसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…..
सुनवाई के दौरान जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्षों से अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगाया गया कि नियमों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में लोगों को ऐसे भवनों में रहने और निवेश करने की अनुमति दी गई, जिन्हें आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त नहीं थीं।
आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता……
मामले में प्रस्तुत आंकड़ों ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार पिछले 20 वर्षों में लगभग 2000 भवनों के नक्शे स्वीकृत किए गए, लेकिन इनमें से केवल 28 भवनों को ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया। वहीं पिछले 15 वर्षों में करीब 650 बिल्डरों को नोटिस जारी किए गए, परंतु उनके विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप……
याचिका में यह भी कहा गया कि दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना फ्लैटों की बिक्री रोकने पर जोर दिया था, लेकिन संबंधित एजेंसियां इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने में विफल रहीं।
कानूनी शिकंजा कसने के संकेत……
हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद शहर के कई बड़े बिल्डरों पर कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। नई याचिका में प्रमुख बिल्डरों के नाम शामिल किए जाने के बाद अवैध निर्माण, नियमों के उल्लंघन और संभावित प्रशासनिक मिलीभगत की जांच तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है. मामले की अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष नई याचिका प्रस्तुत की जा सकती है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



