रांची : राजधानी रांची के फिरायालाल चौक पर सोमवार को ट्रांसजेंडर (तृतीय लिंग) समुदाय ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़, हजारीबाग समेत विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में समुदाय के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान “हमें चाहिए आज़ादी”, “हम सबको चाहिए आज़ादी” और “हम लड़कर लेंगे आज़ादी” जैसे नारे गूंजते रहे।

प्रदर्शन के दौरान उत्थान संस्था (सीबीआई) के सचिव ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित बिल पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय के अस्तित्व और अधिकारों के खिलाफ है। समुदाय वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता आया है और लंबी लड़ाई के बाद उन्हें कानूनी पहचान मिली है।
उन्होंने NALSA v. Union of India का हवाला देते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर समुदाय को तृतीय लिंग के रूप में मान्यता दी गई थी और राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड बनाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन झारखंड में लगभग 10 वर्षों तक ऐसा बोर्ड नहीं बना। बाद में उत्थान संस्था द्वारा रांची हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के बाद बोर्ड का गठन हुआ, लेकिन आज भी वह केवल कागजों तक सीमित है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि झारखंड में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अब तक आश्रय गृह, सामुदायिक भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। यहां तक कि सरकार द्वारा 2 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा भी अब तक लागू नहीं हुई है।
संगठन ने यह भी कहा कि अदालत के आदेशों के बावजूद समुदाय से जुड़े संगठनों को प्राथमिकता नहीं दी जाती। झारखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी पर भी आरोप लगाया गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ काम करने के बावजूद उन्हें उचित अवसर नहीं दिए जाते।
प्रदर्शन के दौरान समुदाय ने यह भी चिंता जताई कि नए प्रस्तावित बिल में ट्रांसपुरुष (Trans Men) को शामिल नहीं किया गया है, जो कि समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं।
अंत में ट्रांसजेंडर समुदाय ने झारखंड सरकार से अपील की कि उनके अधिकारों और जरूरतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए तथा उनके लिए ठोस नीतियां और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
