नई दिल्ली : देश में डिजिटल पेमेंट (UPI) के रिकॉर्ड तोड़ विस्तार के बीच अब एक बार फिर कैश यानी करेंसी नोटों को लेकर बड़ी चर्चा छिड़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत में प्लास्टिक (Polymer) के नोट चलाने का प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती स्तर पर विचाराधीन (Under Consideration) है।

आरबीआई इस समय प्लास्टिक करेंसी के फायदे और नुकसान का गहराई से मूल्यांकन कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता के कैश इस्तेमाल करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्यों पड़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत?
पॉलीमर नोटों की चर्चा दोबारा शुरू होने के पीछे मुख्य वजह छपाई की लगातार बढ़ती लागत और हर साल खराब होने वाले नोटों की भारी संख्या है:
- भारी-भरकम छपाई खर्च: वित्त वर्ष 2025 (FY25) में आरबीआई को नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च करने पड़े हैं।
- जल्दी खराब होते हैं छोटे नोट: बाजार में ₹10 और ₹20 के नोटों का रोटेशन बहुत ज्यादा होता है। पसीने, मिट्टी और पानी के संपर्क में आने से ये नोट बहुत जल्दी मैले और फटे (Soiled Notes) हो जाते हैं, जिन्हें हर साल अरबों की संख्या में नष्ट करना पड़ता है।
क्या हैं पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों की खूबियां?
यह नोट पूरी तरह कड़े प्लास्टिक के नहीं होते, बल्कि एक बेहद पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने होते हैं।
- लंबी उम्र: ये पारंपरिक सूती कागज के नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा चलते हैं, जिससे बार-बार नोट छापने का खर्च बचता है।
- वॉटरप्रूफ और सुरक्षित: इन पर पानी, पसीने या मानसून की नमी का कोई असर नहीं होता। इन्हें आसानी से साफ भी किया जा सकता है।
- नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर नोटों में एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जैसे पारदर्शी विंडो (See-through Windows) और विशेष होलोग्राम लगाए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना नामुमकिन हो जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल ₹500 के नोट का सच (Fact Check)
आरबीआई की इस चर्चा के बीच सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक खबरें और एआई-जनरेटेड तस्वीरें (AI-generated Images) तेजी से वायरल हो रही हैं। दावा किया जा रहा है कि आरबीआई ने महात्मा गांधी की तस्वीर हटाकर अशोक स्तंभ वाली ₹500 की नई प्लास्टिक नोट जारी कर दी है।
फैक्ट चेक: यह दावा पूरी तरह से फर्जी (Fake) है। आरबीआई ने अभी तक कोई भी प्लास्टिक नोट जारी नहीं किया है और न ही महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने का कोई फैसला लिया गया है। जनता ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहे।
पहले क्या रहा है भारत का अनुभव?
भारत के लिए यह प्रयोग नया नहीं है। साल 2012-2014 के बीच केंद्र सरकार और आरबीआई ने देश के 5 अलग-अलग जलवायु वाले शहरों (कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर) में ₹10 के 1 अरब प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल करने की योजना बनाई थी। हालांकि, तब एटीएम (ATMs) और कैश मशीनों की तकनीकी सीमाओं के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। लेकिन आज एक दशक बाद तकनीक बेहद एडवांस हो चुकी है और दुनिया के 60 से अधिक देश (जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन) इसका सफल इस्तेमाल कर रहे हैं।
कब और कैसे आ सकते हैं ये नोट?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आरबीआई इस प्रस्ताव को हरी झंडी देता भी है, तो देश में अचानक कोई नोटबंदी जैसा कदम नहीं उठाया जाएगा। सबसे पहले ₹10 और ₹20 जैसी छोटी करेंसी से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की जा सकती है, ताकि बाजार और एटीएम मशीनों को इसके अनुकूल ढाला जा सके।


























































