नई दिल्ली : पाकिस्तान में बुधवार को हुए दो अलग-अलग दर्दनाक हादसों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक पर्यटक नाव के झील में पलट जाने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है। वहीं, पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में एक निजी ट्यूशन एकेडमी की छत ढहने से 14 बच्चों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घटनाओं के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

सैफुल्ला झील में नाव पलटने से सात की मौत…..
पुलिस के अनुसार, हादसा स्वात जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कलाम स्थित सैफुल्ला झील में हुआ। एक ही परिवार के आठ सदस्य नौका विहार के लिए झील में उतरे थे। इसी दौरान नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई और सभी यात्री पानी में डूब गए। सूचना मिलते ही पुलिस, बचाव दल और स्थानीय स्वयंसेवक मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद सात लोगों के शव बरामद कर लिए गए, जबकि एक व्यक्ति की तलाश अब भी जारी है।
लाहौर में ट्यूशन एकेडमी की छत ढही, 14 बच्चों की गई जान…..
दूसरा हादसा पंजाब प्रांत के लाहौर शहर के काहना क्षेत्र में हुआ, जहां एक निजी ट्यूशन एकेडमी की छत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के समय कक्षाओं में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, जो मलबे में दब गए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हादसे में 14 बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
घंटों चला राहत एवं बचाव अभियान…..
हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल ने कई घंटे तक मलबा हटाने का अभियान चलाया। बचावकर्मियों ने एक महिला शिक्षिका और आठ बच्चों को घायल अवस्था में बाहर निकाला। सभी घायलों को लाहौर जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पांच बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल….
घटना के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने हादसे पर गहरी चिंता जताते हुए निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं। परिषद ने आरोप लगाया कि भवनों की नियमित जांच नहीं होने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण मासूम बच्चों की जान गई। संस्था ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निर्माण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
दोनों हादसों की जांच शुरू……
दोनों घटनाओं के बाद संबंधित प्रशासन ने अलग-अलग जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसों के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। इन घटनाओं ने एक बार फिर पाकिस्तान में सार्वजनिक सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

