नीट सहित विभिन्न परीक्षा-पत्र लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की उठाई मांग
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी ने नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों पर हुई कथित बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में परीक्षा-पत्र लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने तथा छात्रों पर हुई कार्रवाई की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा लेने की मांग की गई है।

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा है कि हाल के वर्षों में नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। वर्षों की मेहनत और तैयारी के बावजूद विद्यार्थियों का परीक्षा प्रणाली से विश्वास उठता जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि पेपर लीक की घटनाओं से कई छात्र मानसिक तनाव का शिकार हुए और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया, जिससे शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य कठोर कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। छात्रों की मांगों का समाधान दमनात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने राष्ट्रपति से छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नीट सहित सभी परीक्षा-पत्र लीक मामलों की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी व्यवस्था लागू करना, छात्रों पर हुई कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग शामिल है। इसके साथ ही छात्रों पर हुई कथित बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा लेने की भी मांग की गई है. पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
