शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि पर उलियान समाधि स्थल पहुंचे सीएम, प्रतिमा और समाधि पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
जमशेदपुर : शहीद निर्मल महतो की पुण्यतिथि के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शनिवार को जमशेदपुर पहुंचे। उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो के समाधि स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिमा एवं समाधि पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने मुख्यमंत्री को गुलदस्ता भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया. श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हिदायतुल्लाह खान सहित कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा एवं समाधि पर पुष्प अर्पित कर उनके संघर्ष, शहादत और योगदान को याद किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज सभी लोग वीर शहीद निर्मल महतो को श्रद्धांजलि देने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही लंबे समय तक मार्गदर्शन देने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों और आम लोगों के हितों के प्रति संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार के काम में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस लड़ाई को भी जीतेगी और राज्य के लाखों लोगों के अधिकार तथा उन्हें मिलने वाली सुविधाएं उनके घर तक पहुंचाने के लिए लगातार काम करती रहेगी. उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है। यहां एक वीर की कहानी शुरू होती है तो उसके साथ दूसरे वीरों के संघर्ष और बलिदान की कहानी भी जुड़ती चली जाती है। उन्होंने शहीद निर्मल महतो के योगदान को झारखंड के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
निर्मल महतो के विचार और संघर्ष हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे : हिदायतुल्लाह खान…..
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि शहीद निर्मल महतो सहित झारखंड के वीर शहीद भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, सिद्धांत और संघर्ष हमेशा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन में शहीद निर्मल महतो की भूमिका महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय रही। उन्होंने झारखंड के अधिकार, पहचान और अलग राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपना जीवन संघर्ष में समर्पित कर दिया। उनकी शहादत ने झारखंड आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की. हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि निर्मल महतो और उनके जैसे अनेक वीरों के संघर्ष एवं बलिदान के परिणामस्वरूप झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीद निर्मल महतो के सपनों का झारखंड बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
