जमशेदपुर : जमशेदपुर के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र का भारतीय टीम में चयन होने से झारखंड के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर है। उनकी इस उपलब्धि को राज्य की समृद्ध क्रिकेट परंपरा में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। महेंद्र सिंह धौनी, ईशान किशन, वरुण आरोन, सौरभ तिवारी और शाहबाज नदीम जैसे खिलाड़ियों के बाद अब कुमार कुशाग्र से भी भारतीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने की उम्मीदें जुड़ गई हैं. झारखंड की धरती ने भारतीय क्रिकेट को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत, लगन और शानदार प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। खास बात यह है कि इस क्षेत्र की क्रिकेट प्रतिभाओं का इतिहास झारखंड राज्य के गठन से भी पुराना है। 15 नवंबर 2000 को झारखंड के अलग राज्य बनने से पहले, अविभाजित बिहार के दौर में भी यहां से जुड़े खिलाड़ियों ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर क्षेत्र का मान बढ़ाया था।

## धौनी ने झारखंड को दिलाई विश्व क्रिकेट में अलग पहचान…….
झारखंड के क्रिकेट इतिहास की चर्चा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के बिना अधूरी है। रांची में पले-बढ़े धौनी ने अपनी असाधारण विकेटकीपिंग, आक्रामक बल्लेबाजी और बेहतरीन कप्तानी के दम पर विश्व क्रिकेट में अलग पहचान बनाई. वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले धौनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने वर्ष 2007 में टी-20 विश्व कप, वर्ष 2011 में वनडे विश्व कप और वर्ष 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता। उनकी सफलता ने न केवल भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि झारखंड के हजारों युवा खिलाड़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी।
## ईशान किशन ने दोहरे शतक से रचा इतिहास……
झारखंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने भी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास पहचान बनाई। वर्ष 2021 में वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले ईशान ने दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मुकाबले में 210 रनों की शानदार पारी खेली थी. इस पारी के साथ उन्होंने वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने यह साबित किया कि झारखंड की धरती पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। वर्ष 2023 में उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में भी खेलने का अवसर मिला।
## वरुण आरोन की रफ्तार ने खींचा दुनिया का ध्यान……
जमशेदपुर के तेज गेंदबाज वरुण आरोन ने अपनी तूफानी रफ्तार से क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया। वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले आरोन ने भारत के लिए टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में खेला. तेज गेंदबाजी को अपनी ताकत बनाने वाले वरुण आरोन ने जमशेदपुर के युवा गेंदबाजों के सामने एक नई मिसाल पेश की। उनकी उपलब्धि ने दिखाया कि छोटे शहरों से निकलकर भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं।
## सौरभ तिवारी और शाहबाज नदीम ने भी बढ़ाया मान…….
जमशेदपुर के बाएं हाथ के बल्लेबाज सौरभ तिवारी ने घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई। वर्ष 2010 में उन्होंने भारतीय वनडे टीम में पदार्पण किया। उनकी बल्लेबाजी ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला. वहीं, झारखंड के अनुभवी बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज शाहबाज नदीम ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई। वर्ष 2019 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। रांची में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला गया मुकाबला उनके लिए खास रहा। नदीम का सफर घरेलू क्रिकेट में निरंतर मेहनत और प्रदर्शन के महत्व को रेखांकित करता है।
## अविभाजित बिहार के दौर में भी चमके थे क्रिकेटर…
झारखंड की क्रिकेट विरासत केवल राज्य गठन के बाद की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। अविभाजित बिहार के दौर में भी इस क्षेत्र से जुड़े खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।
रणधीर सिंह : रणधीर सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वर्ष 1975 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उतरे थे। उन्होंने भारत की ओर से दो वनडे मुकाबले खेले। उस दौर में राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।
सुब्रतो बनर्जी : तेज गेंदबाज सुब्रतो बनर्जी ने वर्ष 1991 में भारतीय वनडे टीम में पदार्पण किया और वर्ष 1992 में टेस्ट क्रिकेट भी खेला। वह 1992 के क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनकी उपलब्धियां अविभाजित बिहार के क्रिकेट इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सबा करीम : विकेटकीपर-बल्लेबाज सबा करीम ने वर्ष 1997 में वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। बाद में वर्ष 2000 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट भी खेला। घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम तक पहुंचे सबा करीम ने आगे चलकर क्रिकेट प्रशासन के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभाई।
## कुमार कुशाग्र से नई उम्मीदें…….
झारखंड के क्रिकेट इतिहास पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि यहां के खिलाड़ियों ने अलग-अलग दौर में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। धौनी की कप्तानी, ईशान किशन की आक्रामक बल्लेबाजी, वरुण आरोन की तेज रफ्तार और शाहबाज नदीम की स्पिन गेंदबाजी ने इस क्षेत्र को क्रिकेट के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई है. अब कुमार कुशाग्र का चयन इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। जमशेदपुर के इस युवा खिलाड़ी की उपलब्धि से स्थानीय क्रिकेटरों और उभरती प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
झारखंड की धरती पर क्रिकेट के प्रति जुनून और प्रतिभा का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में कुमार कुशाग्र का आगे का सफर न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए, बल्कि राज्य के क्रिकेट भविष्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
