रांची/नई दिल्ली : झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बहुचर्चित टेंडर कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद आलमगीर आलम को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उन्हें किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के बदले वसूले जाने वाले कथित कमीशन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के घरेलू सहायक के घर से करीब ₹32 करोड़ की भारी-भरकम नकदी बरामद की थी। इसके बाद ईडी ने पूर्व मंत्री को पूछताछ के लिए बुलाया और लंबी जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई कार्यवाही?
राहत पर रोक : आलमगीर आलम ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए जमानत की गुहार लगाई थी।
पीठ का फैसला : जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल राहत देने से मना कर दिया।
अगली चुनौती : सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब पूर्व मंत्री को फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में ही रहना होगा।
राजनीतिक गलियारे में हलचल
आलमगीर आलम झारखंड की राजनीति के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में उनकी संलिप्तता और अब कोर्ट से राहत न मिलने के कारण राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष की नजरें कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।