जमशेदपुर : शहर के एमजीएम अस्पताल में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने उपायुक्त से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखने तथा समय-समय पर औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। सौरभ विष्णु ने कहा कि एमजीएम अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की चार एंबुलेंस खराब पड़ी हैं, जिसके कारण मरीजों को समय पर इलाज और रेफर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में मरीजों और उनके परिजनों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है।



उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच अस्पताल का सेंट्रल एसी सिस्टम भी ठप पड़ा हुआ है, जिससे वार्डों में भर्ती मरीजों की स्थिति और गंभीर हो रही है। कई जगह मरीजों के परिजन हाथ से पंखा झलकर राहत देने को मजबूर हैं। विशेषकर बर्न विक्टिम और गंभीर मरीजों के लिए बिना वातानुकूलित वातावरण के रहना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है। सौरभ विष्णु ने अस्पताल में पेयजल संकट का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई मरीजों और उनके परिजनों ने शिकायत की है कि अस्पताल में कई बार पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं होता। इसके अलावा विभिन्न विभागों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और इलाज प्रभावित हो रहा है। लॉन्ड्री व्यवस्था प्रभावित होने से भी अस्पताल की स्थिति बदहाल बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त से मुलाकात कर एमजीएम अस्पताल की विभिन्न समस्याओं और अव्यवस्थाओं की जानकारी दी थी। उस समय उपायुक्त द्वारा लगातार निरीक्षण किए जाने से अस्पताल की कई व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिला था। सौरभ विष्णु ने पिछले वर्ष अस्पताल की छत गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ उन्होंने धरना-प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन पर प्रशासनिक दबाव नहीं बनाया गया, तो आने वाले समय में अस्पताल की स्थिति और बदतर हो सकती है।
उन्होंने उपायुक्त राजीव रंजन से मांग की कि एमजीएम अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नियमित निरीक्षण किया जाए तथा अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।



