जमशेदपुर। मानगो के आजादनगर रोड नंबर-15 में ट्रैफिक जांच के दौरान एक गर्भवती महिला को कथित तौर पर तेज धूप में लंबे समय तक खड़ा रखने के मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने ट्रैफिक पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस घटना को पुलिस की संवेदनहीनता और अमानवीय व्यवहार का उदाहरण बताते हुए एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।



सौरभ विष्णु ने बताया कि संबंधित महिला अस्पताल से जांच कराकर अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान ट्रैफिक जांच अभियान के तहत पुलिसकर्मियों ने उनकी बाइक को रोका। उन्होंने कहा कि बाइक चालक और महिला दोनों ने हेलमेट पहन रखा था तथा वाहन के सभी कागजात भी सही थे। केवल प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की अवधि समाप्त होने के कारण चालान काटा गया।
आरोप है कि गर्भवती महिला द्वारा अपनी स्थिति बताने और तबीयत खराब होने की जानकारी देने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और उसे काफी देर तक तेज धूप में खड़ा रखा। सौरभ विष्णु ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ मानवता और संवेदनशीलता भी आवश्यक है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के मामलों में पुलिस को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि महिला की तबीयत बिगड़ जाती या कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली घटना नहीं है। हाल के दिनों में भी वाहन जांच के दौरान एक महिला के घायल होने की घटना सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रैफिक जांच अभियान धीरे-धीरे बर्बरता और मनमानी का रूप लेता जा रहा है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि जांच अभियान के दौरान आम लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। कई बार जांच के नाम पर लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है, जिससे पुलिस की छवि भी खराब होती है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से जमशेदपुर में ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली विवादों में रही है और इसे लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। ट्रैफिक पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगातार लगते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कभी भी जनता का गुस्सा फूट सकता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक पुलिस कानून और न्याय के दायरे से बाहर नहीं है. अंत में उन्होंने एसएसपी से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की, ताकि भविष्य में किसी गर्भवती महिला या आम नागरिक के साथ इस प्रकार का व्यवहार दोबारा न हो।



