जमशेदपुर : शहर और आसपास के क्षेत्रों में सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े भारी वाहनों तथा बिना परमिट चल रहे ट्रकों के कारण बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डिमना, एनएच-33, बर्मामाइंस, आदित्यपुर और पटमदा समेत कई क्षेत्रों में अव्यवस्थित ढंग से खड़े भारी वाहन आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।



उन्होंने कहा कि बर्मामाइंस क्षेत्र में हाल के दिनों में हुए दो बड़े सड़क हादसों के बाद लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। वहीं पटमदा क्षेत्र में भी लगभग प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी वाहनों की अवैध पार्किंग और तेज रफ्तार आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सौरभ विष्णु ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं होने के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। अवैध पार्किंग, ओवरलोडिंग तथा बिना परमिट चलने वाले भारी वाहन आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर ट्रक और अन्य बड़े वाहन घंटों सड़क किनारे खड़े रहते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सड़क पर अवैध रूप से खड़े भारी वाहनों या नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्रकों के कारण किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल चालक या वाहन मालिक की नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की भी बनती है। सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना, अवैध पार्किंग रोकना और ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
सौरभ विष्णु ने “Wrongful Death” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मौत किसी दूसरे की लापरवाही, अवैध पार्किंग, खराब ट्रैफिक व्यवस्था या प्रशासनिक चूक के कारण होती है, तो पीड़ित परिवार न्यायालय में मुआवजे की मांग कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुआवजा किसी व्यक्ति की जिंदगी की कीमत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का कानूनी माध्यम है।
उन्होंने सड़क हादसों में मृतक के परिजनों को न्यूनतम 10 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक प्रशासनिक लापरवाही पर आर्थिक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि जिन परिवारों ने सड़क हादसों में अपने परिजनों को खोया है, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए और न्यायालय में मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में समाज के लोगों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से लोकतांत्रिक न्याय-संविधान को लेकर एक व्यापक पहल शुरू की जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने की संभावना है।



