बिहार : पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन, बिहार की राजधानी का सबसे व्यस्त केंद्र है. यहां रोजाना हजारों यात्री आते-जाते हैं. उनके सामान को कंधों पर लादकर ढोने वाले कूलियों की संख्या भी कम नहीं है।लेकिन इन सबके बीच एक कूली ऐसा है जो अपनी अनोखी पहचान के लिए मशहूर है. इसका नाम है धरमा यादव, उर्फ धर्मनाथ यादव. 50 वर्षीय यह कूली भोजपुर जिले के आरा का रहने वाला है. 1989 से पटना जंक्शन पर कुली नंबर 1 के रूप में काम कर रहा है. दिन भर यात्रियों के थैले-बैग उठाकर प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 10 तक दौड़ता रहता है. इसकी कमाई महज 200 से 300 रुपये प्रतिदिन है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो हर आने-जाने वाले के मन में कौतूहल पैदा करता है – उसके साथ हमेशा दो बॉडीगार्ड्स क्यों घूमते हैं? क्या यह कोई फिल्मी सीन है या सच्चाई?

मिली है प्रॉटेक्शन
कहानी की की शुरुआत 27 अक्टूबर 2013 से हुई थी. उस दिन पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र मोदी (अब प्रधानमंत्री) की हुंकार रैली हो रही थी. लाखों लोग जमा थे. अचानक दोपहर करीब 12 बजे आधा दर्जन से ज्यादा बम धमाके हो गए. अफरा-तफरी मच गई. सात लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हो गए. खुफिया एजेंसियों ने बाद में खुलासा किया कि यह इंडियन मुजाहिदीन और उसके सहयोगी संगठनों की साजिश थी. मोदी जी बाल-बाल बच गए. इसी हाहाकार के बीच धरमा यादव भीड़ में शामिल था. उसने एक संदिग्ध व्यक्ति को देखा, जो भागने की फिराक में था. बिना सोचे-समझे धरमा ने उसे दबोच लिया. वह व्यक्ति मोइनुद्दीन नाम का आतंकी निकला, जो बम विस्फोटों का एक हिस्सा था. धरमा ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया. इस बहादुरी के लिए तत्कालीन बिहार सरकार और केंद्र ने उसे सम्मानित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उसे धन्यवाद दिया था. लेकिन इसके बाद वो आतंकियों के निशाने पर आ गया. उसे जान से मारने की धमकी मिलने लगी. इसके बाद बिहार पुलिस ने धरमा की सुरक्षा के लिए दो कांस्टेबलों को बॉडीगार्ड के रूप में तैनात कर दिया.

