जमशेदपुर : ईएसआईसी गोलमुरी के पूर्व शाखा प्रबंधक सचित कुमार और ईएसआईसी जमशेदपुर के पूर्व सामाजिक सुरक्षा अधिकारी रवि शंकर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ईएसआईसी स्तर पर कथित सतर्कता जांच के बीच अब दोनों पूर्व अधिकारियों के खिलाफ आयकर विभाग में भी औपचारिक शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है. शिकायतकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व प्रवर्तन निदेशालय के माध्यम से भेजी गई शिकायत में दोनों पूर्व अधिकारियों की आय, संपत्ति, निवेश और बैंक खातों की स्वतंत्र एवं गोपनीय जांच कराने का याचिका दायर किया गया है।

आय से अधिक संपत्ति और कर चोरी की जांच की मांग….
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारियों की आय के ज्ञात स्रोतों और उनकी कथित संपत्ति एवं वित्तीय गतिविधियों के बीच अंतर की जांच की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने आय से अधिक संपत्ति, अघोषित आय और संभावित कर चोरी से संबंधित पहलुओं की विधि-सम्मत जांच की मांग की है. शिकायत में करीब एक वर्ष की अवधि के दौरान ₹25 लाख से अधिक की कथित अवैध वसूली से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने का आग्रह किया है।
ITR और बैंक खातों की पड़ताल का आग्रह…….
आयकर विभाग से शिकायत में संबंधित अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न (ITR), बैंक खातों एवं लेन-देन, निवेश और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड का विधि-सम्मत परीक्षण करने की मांग की गई है। इसके साथ ही कथित बेनामी संपत्ति अथवा अघोषित निवेश की स्थिति की भी जांच किए जाने का अनुरोध किया गया है।
CVC और PMO तक पहुंच चुका है मामला…….
शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और पद के कथित दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें पहले ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तथा अन्य संबंधित सतर्कता एवं निगरानी एजेंसियों के संज्ञान में लाई जा चुकी हैं. बताया गया है कि आयकर विभाग को भेजे गए आवेदन की प्रतियां प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ज्वाइंट डायरेक्टर (इंटेलिजेंस), नई दिल्ली एवं रांची जोनल कार्यालय तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
शिकायतकर्ता ने कहा “आरोप नहीं, निष्पक्ष जांच जरूरी”……
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि आवेदन में लगाए गए बिंदु फिलहाल शिकायत और जांच योग्य सूचनाएं हैं तथा इन्हें किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि सक्षम वैधानिक एजेंसियां यदि वित्तीय अभिलेखों, आयकर रिटर्न, बैंकिंग लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच करती हैं तो वास्तविक तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर क्या कार्रवाई करती हैं। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा दोनों पूर्व अधिकारियों का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।
