जमशेदपुर : सिदगोड़ा स्ट्रेट माइल रोड स्थित निजी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। जमीन मालिक प्रभाकर राव पूरी और अरुण सिंह ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर टाटा स्टील और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के सहयोग से टाटा स्टील की ओर से की गई कार्रवाई में न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की गई और करीब 40 वर्षों से बने आवास को तोड़ दिया गया।

जमीन मालिकों के अनुसार, विवादित जमीन जेएनएसी के वार्ड संख्या 11 के खाता संख्या 52 के अंतर्गत प्लॉट संख्या 2762 (पी) और 2763 (पी) में स्थित है। उनका दावा है कि उक्त जमीन को लेकर पूर्व में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) न्यायालय तथा उपायुक्त स्तर पर जांच के बाद उनके पक्ष में आदेश पारित किया जा चुका है। साथ ही जमीन के मालिकाना हक को लेकर जिला न्यायालय, जमशेदपुर में सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में टाइटल सूट संख्या 111/2011 भी लंबित है।
प्रभाकर राव पूरी ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने के लिए एसडीओ द्वारा प्लॉट संख्या 2762 (पी) और 2763 (पी) को लेकर आदेश जारी किया गया था, लेकिन कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम ने केवल प्लॉट संख्या 2763 पर ही तोड़फोड़ की। उनका कहना है कि प्लॉट संख्या 2762 समेत आसपास के अन्य हिस्सों में बड़े निर्माण होने के बावजूद वहां कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इसे प्रशासन की कार्रवाई में दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
2009 के आदेशों का दिया हवाला……
जमीन मालिकों ने प्रेस विज्ञप्ति में वर्ष 2009 की न्यायिक कार्यवाही का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, टाटा स्टील की ओर से 19 फरवरी 2009 को अपर आयुक्त तथा 21 फरवरी 2009 को एसडीओ को पत्र एवं प्रतिवेदन दिया गया था। इसके बाद मामले की जांच हुई और एसडीओ तथा उपायुक्त स्तर से उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए थे।
उन्होंने अनुमंडल दंडाधिकारी, धालभूम, जमशेदपुर के न्यायालय में मिस केस संख्या 48/2009 के तहत धारा 144 सीआरपीसी में हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, बाद में 27 अप्रैल 2009 के आदेश के तहत द्वितीय पक्ष के विरुद्ध लगाए गए निषेधाज्ञा संबंधी आदेश को हटा दिया गया था. जमीन मालिकों का कहना है कि इन्हीं पूर्व आदेशों के आधार पर भविष्य में विवाद से बचने के लिए जमीन के मालिकाना हक को लेकर वर्ष 2011 में टाइटल सूट दायर किया गया था, जो अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी 20 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी….
प्रभाकर राव पूरी ने आरोप लगाया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उनके 40 वर्षों पुराने आवास को तोड़ा गया। उन्होंने इसे न्यायालय की अवमानना बताते हुए कहा कि टाटा स्टील और जिला प्रशासन की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी. प्रेस विज्ञप्ति में टाटा स्टील की लीज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जमीन मालिकों का दावा है कि कंपनी की लीज दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुकी है और अब तक उसका नवीनीकरण नहीं हुआ है। हालांकि, इन दावों और संबंधित न्यायिक आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के स्तर पर नहीं हो सकी है।
86 बस्तियों के मालिकाना हक को लेकर आंदोलन की तैयारी……
इस मामले को लेकर अधिवक्ता रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि 86 बस्तियों को लीज व्यवस्था से मुक्त कराने और वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लीज के नाम पर टाटा स्टील द्वारा आम लोगों के साथ मनमानी की जा रही है. उन्होंने कहा कि 86 बस्तियों के मालिकाना हक को लेकर “86 बस्ती मालिकाना हक संघर्ष समिति” का गठन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने टाटा स्टील के सरकार के साथ लंबित लीज नवीनीकरण को भी स्थायी रूप से निरस्त करने की मांग उठाने की बात कही।
अधिवक्ता रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि शहर के विधायक और सांसद इस मामले में जनता का साथ दें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 86 बस्तियों के लोग टाटा स्टील की कथित मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे. जमीन मालिक प्रभाकर राव पूरी ने प्रशासन और संबंधित पक्षों से पूरे मामले में न्यायालय में लंबित वाद, पूर्व में पारित आदेशों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।