जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन से जुड़े सिक्योरिटी वर्क्स के एक कर्मचारी पर ड्यूटी में कथित मनमानी और कार्यस्थल से बिना सूचना गायब होने का मामला सामने आया है। अखबार सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी रुपेश कुमार पांडेय (यूसीएम नंबर 154599) की 17 मई 2026 को बी शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक ड्यूटी निर्धारित थी. सूत्रों के मुताबिक, निर्धारित शिफ्ट में ड्यूटी करने के बजाय कर्मचारी ने कथित तौर पर बिना किसी सक्षम अधिकारी को सूचना दिए अपनी ड्यूटी को डी शिफ्ट यानी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक कर लिया। आरोप है कि डी शिफ्ट में पंच करने के बाद वह ड्यूटी स्थल से निकल गए और निर्धारित कार्य अवधि पूरी किए बिना चले गए। बताया जाता है कि शाम में पुनः आउट पंच करने के लिए उनके कार्यस्थल पर पहुंचने की जानकारी सामने आई. मामले की जांच के दौरान कर्मचारी की ड्यूटी और पंचिंग से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। सूत्रों का दावा है कि जांच में कर्मचारी को दोषी पाए जाने के बाद प्रबंधन की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस/चार्जशीट जारी की गई।

यूनियन के दबाव से मामले को कमजोर करने की चर्चा…..
इधर, मामले में अब एक नया मोड़ आने की बात सामने आ रही है। अखबार सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी के पक्ष में यूनियन स्तर से दबाव बनाए जाने और कार्रवाई को हल्का करने की कोशिश की चर्चा है। आरोप यह भी है कि मामले की गंभीरता के बावजूद इसे किसी तरह “लीपापोती” कर खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच में ड्यूटी संबंधी अनियमितता प्रथम दृष्टया सामने आई थी और इसी आधार पर चार्जशीट जारी की गई, तो बाद में कार्रवाई को कमजोर करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
रिकॉर्ड से सामने आएगा सच….
जानकारों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए ड्यूटी रोस्टर, पंचिंग रिकॉर्ड, शिफ्ट परिवर्तन की अनुमति, संबंधित अधिकारियों की जानकारी और चार्जशीट में दर्ज आरोपों की जांच जरूरी है। यदि शिफ्ट बदलने की अनुमति नहीं ली गई थी और पंचिंग के बाद कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे, तो यह कंपनी के निर्धारित कार्य अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर कथित यूनियन दबाव के आगे मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
