गुरुजी हम सभी के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे : हिदायतुल्लाह खान
जमशेदपुर : आज राज्य के सभी जिलों में झारखंड अलग राज्य के गठन के सबसे मजबूत नेताओं में शुमार, महान जननेता एवं गरीबों के मसीहा दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नेमरा में सरकारी स्तर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए. इसी क्रम में जमशेदपुर में भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सबसे पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा के जमशेदपुर जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन के नेतृत्व में सुबह 10 बजे डीसी कार्यालय के सामने स्थित जेएमएम के संपर्क कार्यालय में गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान सहित जेएमएम केंद्रीय समिति के सदस्य एवं सभी जिला पदाधिकारी मौजूद रहे।
केंद्रीय समिति के सदस्यों में विशेष रूप से मोहन करमकार, प्रमोद लाल, राजू गिरी, आर्तिक महतो तथा पूर्व सांसद सुमन महतो उपस्थित रहे। संपर्क कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद सभी पदाधिकारी रैली के रूप में जुबली पार्क स्थित गोलचक्कर पहुंचे। वहां आदिवासी रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार जिला समिति के नेतृत्व में पथलगड़ी की गई। इसी स्थान पर गुरुजी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसके बाद सभी वरिष्ठ नेता सोनारी पहुंचे। वहां जेएमएम कार्यालय में केंद्रीय समिति के सदस्य पवन कुमार सिंह के नेतृत्व में भव्य सभा का आयोजन किया गया।

इस दौरान गुरुजी की प्रतिमा स्थापित की गई। साथ ही सभी लोगों ने गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सभी नेता मानगो एमजीएम चौक पहुंचे। वहां गुरुजी की प्रतिमा के साथ एक रथ तैयार किया गया और जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में रथ के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस के नारगा पहुंचने पर सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया। इस अवसर पर आंदोलनकारियों को सम्मानित भी किया गया। इसके बाद यह जुलूस गालूडीह, घाटशिला और धालभूमगढ़ होते हुए चाकुलिया टाउन हॉल पहुंचा, जहां जुलूस एक भव्य सभा में तब्दील हो गया। सभा के दौरान सभी नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उनकी सेवाओं, संघर्षों और योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि गुरुजी हम लोगों के दिलों में जीवित हैं और हमेशा जीवित रहेंगे। गुरुजी की यादें हमेशा हमारे साथ जुड़ी रहेंगी। उनके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुरुजी ने जंगलों में रहकर झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई लड़ी और दबे-कुचले लोगों की आवाज को बुलंद किया, वह ऐतिहासिक है। आदिवासी, मूलवासी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में गुरुजी के अधूरे कार्यों को उनके सुपुत्र और हमारे राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक धरती और आसमान कायम रहेगा, तब तक गुरुजी का नाम अमर रहेगा और उनके बलिदानों को याद किया जाता रहेगा।
हिदायतुल्लाह खान ने आगे कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड की पहचान, अधिकार और वंचित वर्गों की आवाज बनकर जीवनभर संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपनी पूरी राजनीतिक जिंदगी में आदिवासी, पिछड़े और गरीब जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा झारखंड अलग राज्य गठन के आंदोलन को एक मजबूत दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का सादा जीवन, जनता से उनका गहरा जुड़ाव और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के लिए उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी सेवाओं और बलिदानों को आने वाली पीढ़ियां भी हमेशा याद रखेंगी।
