मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 1,200 अंक तक टूट गया और 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि कारोबार के अंतिम घंटों में गिरावट कुछ कम हुई, लेकिन बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 198.50 अंक टूटकर 22,421.95 पर पहुंच गया। इस तेज गिरावट के बीच बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 465 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया। निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

30 में सिर्फ 6 शेयर हरे, 24 में गिरावट…..
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से महज छह शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 24 शेयर लाल निशान में रहे। इंफोसिस 4.11 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा टीसीएस, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और टेक महिंद्रा में भी तेजी रही. दूसरी ओर मारुति सुजुकी 4.86 फीसदी टूटकर सबसे बड़ा लूजर रहा। महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और आईटीसी के शेयरों में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई।
ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा मार……
गुरुवार को ऑटो शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4 फीसदी से अधिक टूट गया। मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट रही। सितंबर की ऑटो बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहने को इसकी प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बढ़ा……
बाजार में गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी अहम वजह रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 10,148 करोड़ रुपये की निकासी की। इस सप्ताह अब तक उनकी बिकवाली करीब 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
महंगा डॉलर, कमजोर रुपया और बढ़ी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड…….
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ाया। कारोबार के दौरान 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.342 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 95.98 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया. लगातार तीसरे कारोबारी दिन की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अब बाजार की नजर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल, वैश्विक संकेतों और आने वाले कॉरपोरेट नतीजों पर टिकी है।
