सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
लोकतंत्र सवेरा/जादूगोड़ा : आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी कठिनाइयों से हार मान लेते हैं, वहीं 75 वर्षीय आरबी महतो अपनी मेहनत और संघर्ष से समाज के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे प्रतिदिन धालभूमगढ़ प्रखंड के प्रकरघाटी गांव से जादूगोड़ा पहुंचकर गन्ने का रस बेचते हैं और अपने श्रम से आजीविका चला रहे हैं।



जादूगोड़ा मोड़ चौक, नवरंग मार्केट, स्टेशन रोड और स्कूल गेट के आसपास आरबी महतो का ठेला अक्सर नजर आता है। गर्मी के मौसम में उनके ठेले पर लोगों की अच्छी भीड़ जुटती है। खासकर स्कूली बच्चे और राहगीर उनके यहां ताजा गन्ने का रस पीना पसंद करते हैं।
आरबी महतो बताते हैं कि गन्ने का रस स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है और गर्मी में यह शरीर को राहत पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि मेहनत ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है और जब तक शरीर साथ देगा, वे काम करते रहेंगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार आरबी महतो वर्षों से इसी तरह मेहनत कर रहे हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी और ग्राहकों के प्रति अपनापन लोगों को काफी प्रभावित करता है। सीमित आय के बावजूद उनके चेहरे की मुस्कान और काम के प्रति समर्पण उन्हें दूसरों से अलग पहचान दिलाता है।
आरबी महतो आज उन लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं, जो मेहनत और आत्मसम्मान को जीवन की असली पूंजी मानते हैं। उम्र भले ही 75 वर्ष हो चुकी हो, लेकिन उनके हौसले आज भी युवाओं जैसे मजबूत और जीवंत हैं।



