‘द हाइप एंटरटेनमेंट’, अर्नब कुमार कोले और अमरनाथ योगी की पहल; तीन घंटे के हैंड्स-ऑन सेशन में डॉक्टर, छात्र, कलाकार और प्रोफेशनल्स ने प्राकृतिक रंगों से कैनवास पर उकेरीं सोहराई पेंटिंग
जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित कैफे रीगल में रविवार को झारखंड की समृद्ध पारंपरिक लोक कला सोहराई को समर्पित एक दिवसीय व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘द हाइप एंटरटेनमेंट’ (THE), विजुअल आर्टिस्ट अर्नब कुमार कोले और इंजीनियर अमरनाथ योगी के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 21 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले तीन घंटे के इस हैंड्स-ऑन सेशन में प्रतिभागियों ने सोहराई कला को सिर्फ जाना ही नहीं, बल्कि उसे अपने हाथों से कैनवास पर उकेरकर महसूस भी किया। कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी और आधुनिक समाज को झारखंड की इस प्राचीन लोक कला की ऐतिहासिकता, सांस्कृतिक प्रतीकों और परंपराओं से जोड़ना तथा इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना था।

प्रकृति, लोक आस्था और जनजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति……
सोहराई पेंटिंग झारखंड के फसल कटाई उत्सव और ग्रामीण जीवन से जुड़ी एक समृद्ध कला परंपरा है। पारंपरिक रूप से मिट्टी के घरों की दीवारों पर गेरू, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों के माध्यम से इसे उकेरा जाता है। सोहराई चित्रों में पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, प्राकृतिक तत्व और जनजीवन से जुड़े विभिन्न प्रतीकों का कलात्मक चित्रण देखने को मिलता है. झारखंड की इस विशिष्ट लोक कला को उसकी क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक महत्ता के कारण जीआई (Geographical Indication) टैग भी प्राप्त है। जीआई टैग किसी विशिष्ट क्षेत्र से जुड़े उत्पाद, कला या परंपरा को पहचान और कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
इतिहास की समझ से कैनवास पर रचनात्मक अभिव्यक्ति तक…..
कार्यशाला की शुरुआत परिचयात्मक सत्र से हुई, जिसमें प्रतिभागियों को सोहराई कला के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और पारंपरिक स्वरूप की जानकारी दी गई। इसके बाद मुख्य मार्गदर्शक एवं विजुअल आर्टिस्ट अर्नब कुमार कोले ने सोहराई की विभिन्न शैलियों, रंग-संयोजन, पारंपरिक आकृतियों और प्रतीकों के अर्थ को लाइव डेमो के माध्यम से समझाया।
फाइन आर्ट्स के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले अर्नब कुमार कोले हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ‘वन स्टेट वन आर्टिस्ट’ (OSOA) लोक कला सम्मेलन में झारखंड की सोहराई कला का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं. इसके बाद कार्यशाला के दूसरे चरण में सभी 21 प्रतिभागियों ने उनके मार्गदर्शन में स्वयं सोहराई पेंटिंग तैयार की। डॉक्टरों, कलाकारों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और जनजातीय समुदाय से जुड़े प्रतिभागियों ने एक साथ बैठकर कैनवास पर अपनी रचनात्मकता को आकार दिया। इससे कार्यशाला में कला, संस्कृति और सामाजिक विविधता के खूबसूरत संगम का माहौल देखने को मिला।
अतिथियों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह…..
कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अन्नी अमृता तथा माहवारी स्वच्छता के क्षेत्र में अपने संगठन ‘निश्चय’ के माध्यम से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार भी मौजूद रहे. कार्यक्रम के समापन पर सभी 21 प्रतिभागियों की तैयार की गई कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
‘सोहराई को महसूस कराने का मंच देना था उद्देश्य’…..
आयोजक अमरनाथ योगी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ सोहराई कला का इतिहास बताना नहीं, बल्कि लोगों को स्वयं इसे कैनवास पर उतारने और महसूस करने का अवसर देना था। विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों को एक साथ बैठकर कला रचते देखना बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और युवाओं को अपनी लोक कला से जोड़ने के लिए भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक आयोजन जारी रखे जाएंगे. वहीं, प्रतिभागियों ने कार्यशाला के अनुभव को बेहद सुखद और सुकूनभरा बताया। प्रतिभागियों का कहना था कि तीन घंटे कब बीत गए, इसका पता ही नहीं चला। बिना किसी प्रतियोगिता या दबाव के सभी ने एक-दूसरे से सीखा और कला का आनंद लिया। उनके अनुसार, ऐसा शांत और सकारात्मक माहौल आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलता है।
