✍️ सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
सुबह के पांच बजे हैं। पूरा घर अभी गहरी नींद में है, लेकिन एक मां की दिनचर्या शुरू हो चुकी है। रसोई में चूल्हा जल रहा है, चाय की भाप उठ रही है और उसी धुएं के बीच एक औरत अपनी अधूरी नींद, शरीर की थकान और मन के दर्द को चुपचाप कहीं छुपा रही है। वह मां है… जिसके लिए “आराम” शायद जिंदगी का सबसे अनजान शब्द बन चुका है।



बचपन में जब भी हम गिरते थे, चोट हमें लगती थी लेकिन दर्द मां की आंखों में दिखता था। बुखार हमारे शरीर को होता था, मगर पूरी रात जागकर माथा सहलाने वाली मां होती थी। स्कूल की फीस कम पड़ जाए तो अपनी नई साड़ी की इच्छा छोड़ देने वाली भी मां ही होती है। बच्चों की छोटी-छोटी खुशियों के लिए वह अपनी बड़ी-बड़ी ख्वाहिशों का गला घोंट देती है।
घर में सबके खाने के बाद जो आखिरी रोटी बचती है, अक्सर वही मां की होती है। सबके त्योहार नए कपड़ों में गुजरते हैं, लेकिन मां सालों पुरानी साड़ी में भी मुस्कुरा देती है। वह हमेशा यही कहती है — “मुझे कुछ नहीं चाहिए…” लेकिन सच यह है कि उसे भी कभी-कभी सिर्फ दो पल का अपनापन, थोड़ा सा सम्मान और अपनों का साथ चाहिए होता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सफलता की सीढ़ियां तो चढ़ रहे हैं, लेकिन मां से दूर होते जा रहे हैं। मोबाइल में हजारों नंबर सेव हैं, मगर मां का मिस्ड कॉल कई बार “बाद में बात करेंगे” की भीड़ में दब जाता है। शहरों की चमक में लोग यह भूल जाते हैं कि गांव के किसी छोटे से घर में एक बूढ़ी मां आज भी दरवाजे पर नजर टिकाए बैठी है… शायद आज बेटा फोन कर ले… शायद आज बेटी मिलने आ जाए।
मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह एहसास है जो बिना किसी स्वार्थ के पूरी जिंदगी अपने बच्चों पर लुटा देती है। जब पूरी दुनिया साथ छोड़ देती है, तब भी एक मां ही होती है जो मुस्कुराकर कहती है — “कोई बात नहीं… मैं हूं ना।”
सच तो यह है कि जिस दिन मां की आंखों से आंसू गिरते हैं, उस दिन शायद भगवान भी कहीं न कहीं जरूर रोता होगा।
मदर्स डे केवल सोशल मीडिया पर तस्वीर लगाने या स्टेटस डालने का दिन नहीं है। यह उस औरत के त्याग, प्रेम और संघर्ष को महसूस करने का दिन है, जिसने खुद दर्द सहकर हमें मुस्कुराना सिखाया। जिसने खुद भूखे रहकर हमें खिलाया और खुद अंधेरे में रहकर हमारी जिंदगी रोशन की।
अगर मां आपके पास है, तो आज उनके साथ थोड़ा वक्त बिताइए। उनका हाथ पकड़कर सिर्फ इतना कह दीजिए —
“मां, आप हो… इसलिए मेरी दुनिया खूबसूरत है।”
क्योंकि जिस दिन मां चली जाती है, उस दिन घर की दीवारें तो वही रहती हैं… लेकिन घर, फिर घर नहीं रह जाता।
