जमशेदपुर : राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (1 से 7 सितंबर) के अवसर पर ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, जमशेदपुर की वरिष्ठ डाइटिशियन प्रिया द्विवेदी ने भारतीय खानपान में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन में अक्सर चावल, रोटी और सब्जियों की मात्रा अधिक होती है, जबकि दाल, फलियां, दूध, दही, पनीर, अंडे और अन्य प्रोटीन स्रोतों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।

उन्होंने बताया कि प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों के निर्माण, कोशिकाओं की मरम्मत, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से लगातार थकान, बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना, घाव भरने में देरी और बार-बार संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रिया द्विवेदी के अनुसार सामान्य वयस्क को प्रतिदिन शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। 60 किलो वजन वाले व्यक्ति के लिए यह मात्रा करीब 48 से 60 ग्राम प्रतिदिन हो सकती है। हालांकि उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरत बदल सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट जरूरी नहीं हैं। रोजाना के भोजन में दाल, चना, राजमा, पनीर, दूध, दही, अंडा, मछली, चिकन, टोफू, सोया, मेवे और बीज शामिल किए जा सकते हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, खिलाड़ियों और बीमारी या सर्जरी से उबर रहे लोगों को अपने प्रोटीन सेवन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
