“यह कैसा न्याय है, जहाँ ताकतवर खुलेआम मनमानी करें और कमजोर सिर्फ सहते रहें?”
“क्या झारखंड में इंसाफ अब हैसियत देखकर मिलता है?”
लोकतंत्र सवेरा | जमशेदपुर : जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत गाढ़ाबासा लाइन नंबर–7, मकान संख्या 625 A में रहने वाला स्वर्गीय कृष्णा कुमार का परिवार आज खुद को असहाय, डरा हुआ और सिस्टम से ठगा हुआ महसूस कर रहा है।



परिवार के घर के सामने नाला के बाद पार्किंग की खाली जगह है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। 29 दिसंबर 2025 को यही विवाद इस कदर बढ़ गया कि स्वर्गीय कृष्णा कुमार के छोटे बेटे विजय कुमार की जान पर बन आई।
परिवार ने थाना में शिकायत दी, उम्मीद थी कि कानून उनका साथ देगा।
लेकिन सवाल उठता है —
“जब शिकायत हो जाए, तब भी अगर कार्रवाई न हो, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?”
“कार्रवाई नहीं हुई, मजबूरी में परिवार ने खुद को बचाने का रास्ता चुना”…….
थाने से निराश होकर परिवार ने अपने घर की सुरक्षा के लिए बेरिकेटिंग कर दी।
घर के आगे लोहे के 5 पाइप और पीछे की ओर 3 पाइप लगाकर उन्होंने यह साफ संदेश दिया कि —
“हम लड़ना नहीं चाहते, सिर्फ सुरक्षित रहना चाहते हैं।”
लेकिन शायद यह सुरक्षा भी कुछ लोगों को रास नहीं आई।
14 जनवरी को टूटा कमजोर का सहारा…….
14 जनवरी 2026 को अचानक JUSCO (जुस्को) की टीम पूरे दलबल के साथ पहुंची और बिना किसी संवेदनशीलता के परिवार द्वारा की गई बेरिकेटिंग को तोड़ दिया।
परिवार का आरोप है कि टीम ने कहा —
“आप यह नहीं कर सकते, हमें ऊपर जवाब देना पड़ेगा।”
अब सवाल यह उठता है —……
👉 क्या स्वर्गीय कृष्णा कुमार के परिवार से ही ‘ऊपर’ जवाब मांगा जाता है?
👉 बाकी रसूखदारों के लिए कोई नियम नहीं?
👉 क्या कानून सिर्फ कमजोरों को दबाने के लिए है?
“कमजोर को दबाओ, डराओ और चुप करा दो?”
परिवार के लोगों की आंखों में डर है, आवाज में गुस्सा और दिल में सवाल —
“क्या हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम कमजोर हैं?”
“क्या हमें डर के साए में ही जीवन काटना होगा?”
“क्या अब यही विकल्प बचा है कि सब कुछ बेचकर यहां से पलायन कर जाएं?”
परिवार का यह भी आरोप है कि
“यह पूरी कार्रवाई किसी दबाव या पैरवी के तहत की गई है।”
मुख्यमंत्री से आखिरी उम्मीद……
परिवार ने अब इस मामले को राज्य के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन तक पहुंचाने का फैसला किया है।
उनका साफ कहना है —
“अब मुख्यमंत्री ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं।”
“अगर वहां भी सुनवाई नहीं हुई, तो समझ लेंगे कि कमजोरों के लिए इस राज्य में कोई न्याय नहीं।”
लोकतंत्र सवेरा पूछता है सवाल…….
🔴 क्या झारखंड में कानून सबके लिए बराबर है?
🔴 क्या रसूख और पहुंच के आगे आम आदमी की कोई कीमत नहीं?
🔴 क्या प्रशासन सिर्फ ताकतवरों की सुविधा के लिए काम कर रहा है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, अब निगाहें आप पर हैं।
क्या स्वर्गीय कृष्णा कुमार के परिवार को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
लोकतंत्र सवेरा — आवाज़ उस सच की, जो दबाया जा रहा है।
