रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में विभाग के अंतर्गत चल रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, बजट के उपयोग और धरातल पर उनके प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।



बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को कार्यप्रणाली में तेजी लाने और योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु और बड़े फैसले:
- छात्रवृत्ति वितरण में तेजी: सीएम ने निर्देश दिया कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलने वाली प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का भुगतान बिना किसी देरी के सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में सुनिश्चित किया जाए।
- आवासीय विद्यालयों का कायाकल्प: राज्य में संचालित सभी कल्याण विभाग के आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, और भोजन की गुणवत्ता को सुधारने के सख्त निर्देश दिए गए। लापरवाही बरतने वाले प्रबंधकों पर सीधी कार्रवाई होगी।
- कौशल विकास और रोजगार: अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रमों के दायरे को और बढ़ाने पर चर्चा हुई।
- जवाबदेही तय: मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर सुस्ती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर प्रगति रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री का बयान:
“कल्याण विभाग की योजनाएं झारखंड के गरीब, शोषित और वंचित समाज की रीढ़ हैं। हर योग्य व्यक्ति को उसका हक मिलना चाहिए, चाहे वह राज्य के किसी भी सुदूर ग्रामीण इलाके में रहता हो। अधिकारी दफ्तरों से निकलकर धरातल पर काम की मॉनिटरिंग करें।”
— हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड)



