राँची : झारखंड की राजनीति और सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड सरकार के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब दो साल तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद, शीर्ष अदालत ने उन्हें और उनके पूर्व पीए (PA) संजीव कुमार लाल को नियमित जमानत दे दी है।
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प्रमुख बिंदु :
- लंबी कानूनी लड़ाई का अंत : प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा टेंडर कमीशन मामले में कार्रवाई के बाद आलमगीर आलम सलाखों के पीछे थे। लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के बाद आज उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली।
- स्वास्थ्य और उम्र का हवाला : अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का भी हवाला दिया गया था।
- सियासी हलचल तेज : विधानसभा चुनावों और राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आलमगीर आलम की रिहाई कांग्रेस और गठबंधन सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।
क्या था मामला?
ज्ञात हो कि मई 2024 में ED ने आलमगीर आलम के सचिव के करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहाँ भारी मात्रा में नकद बरामदगी हुई थी। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
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