रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच अब कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रांची और हजारीबाग में कुछ कोचिंग संस्थानों एवं उनसे जुड़े परिसरों पर कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संभावित कनेक्शन की जांच तेज कर दी है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या किसी कोचिंग संस्थान या उससे जुड़े व्यक्तियों की परीक्षा अथवा साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने में कोई भूमिका थी। CBI छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और पूछताछ से सामने आई जानकारियों को आपस में जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां खंगाल रही है।
जांच के दौरान अभय तिवारी से कथित पूछताछ में साक्षात्कार में सफलता दिलाने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक लिए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इस दावे की CBI द्वारा पुष्टि और सत्यापन किया जा रहा है। इसलिए फिलहाल इसे जांच के दौरान सामने आया कथित तथ्य ही माना जा रहा है। मामले की जांच में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य और डॉ. जमाल अहमद के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पतंजलि कोचिंग से जुड़े रवि कुमार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह तथा कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के कथित संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
CBI अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन व्यक्तियों के बीच आपसी संपर्क, वित्तीय लेनदेन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संभावित संबंध किस हद तक थे। जांच एजेंसी बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर कथित नेटवर्क की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में जुटी है।फिलहाल मामले की जांच जारी है और CBI द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित आरोपों की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
