बंडामुंडा रेलखंड में करीब दो दर्जन हाथियों ने ट्रैक पर डाला डेरा, वन विभाग की टीम हाथियों को हटाने में जुटी
चक्रधरपुर। हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर जंगली हाथियों के झुंड ने रेल परिचालन को प्रभावित कर दिया है। चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा रेलखंड में ए और डी केबिन के बीच करीब दो दर्जन हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पर डेरा जमाए हुए है। रात से ट्रैक पर मौजूद हाथियों के सुबह तक नहीं हटने के कारण रेल परिचालन बाधित हो गया है। इस वजह से चार एक्सप्रेस ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर खड़ी हैं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

चार एक्सप्रेस ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर रुकीं
हाथियों के रेलवे ट्रैक पर आने से लंबी दूरी की चार एक्सप्रेस ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस (13352): रात 1:45 बजे से राउरकेला स्टेशन पर खड़ी है।
- धनबाद स्पेशल (18403): सुबह 6:15 बजे से राउरकेला स्टेशन पर रुकी हुई है।
- सूरत-मालदा एक्सप्रेस (13425): सुबह 6 बजे से बांगुरकेला स्टेशन पर खड़ी है।
- शालीमार सुपरफास्ट (20971): सुबह 7 बजे से कलूंगा स्टेशन पर रुकी हुई है।
ट्रेनों के लंबे समय तक रुके रहने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और लंबी दूरी की यात्रा कर रहे यात्रियों को खाने-पीने सहित अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हाथियों को जंगल की ओर भेजने में जुटा वन विभाग
घटना की सूचना मिलने के बाद राउरकेला वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर हाथियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। वहीं, रेलवे का ऑपरेटिंग विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाथियों की मौजूदगी के कारण रेल परिचालन सामान्य होने में देरी हो रही है। वन विभाग और रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए रेलवे ट्रैक से हटाना है, ताकि रेल परिचालन दोबारा शुरू किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
पांच महीने से ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही बनी चिंता
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले करीब पांच महीनों से इस रेलखंड पर हाथियों के रेलवे ट्रैक पर आने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे रेल परिचालन प्रभावित होने के साथ-साथ यात्रियों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी के कारण जहां यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं तेज रफ्तार ट्रेनों से हाथियों के टकराने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में इस रेलखंड पर हाथियों की आवाजाही को नियंत्रित करने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। फिलहाल यात्रियों की नजरें हाथियों के ट्रैक से हटने और रेल परिचालन सामान्य होने पर टिकी हैं।
लोकतंत्र सवेरा| झारखंड

