नई दिल्ली : देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून लागू हो गया है।राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, अब पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्यों में ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का भी प्रावधान किया गया है। नए कानून के तहत व्यक्तिगत स्तर पर पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के दोषी पाए जाने पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं, संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

गौरतलब है कि इस संशोधन विधेयक को 29 जुलाई को लोकसभा और 30 जुलाई को राज्यसभा ने पारित किया था। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
