सदस्यों ने पारदर्शी सदस्यता प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव की उठाई मांग, 16 कार्यकारिणी सदस्यों के विरोध का भी दावा
जमशेदपुर : उत्कल एसोसिएशन की वार्षिक आमसभा रविवार को हंगामेदार माहौल में संपन्न हुई। बैठक के दौरान अध्यक्ष डॉ. श्रीधर प्रधान एवं महासचिव तरुण मोहंती की कार्यशैली को लेकर सदस्यों ने खुलकर नाराजगी जताई और संगठन की नियमावली की अनदेखी करने का आरोप लगाया। बैठक के दौरान काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही. जानकारी के अनुसार, 28 जून को आयोजित वार्षिक आमसभा में 18 एजेंडों पर चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन प्रकाशित सदस्य सूची में दर्ज 873 सदस्यों में से केवल 112 सदस्य ही उपस्थित हुए। आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। इसके बाद महासचिव ने 5 जुलाई को दोबारा वार्षिक आमसभा आयोजित करने की घोषणा की थी।

रविवार को आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में सदस्य सदस्यता प्रक्रिया, लंबित प्रस्तावों और आगामी चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अध्यक्ष और महासचिव ने इन विषयों पर विस्तृत चर्चा कराए बिना केवल चुनाव की तिथि की घोषणा की और कुछ ही मिनटों में बैठक समाप्त कर परिसर से चले गए. इससे नाराज सदस्यों ने बैठक की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया। महिलाओं सहित कई सदस्यों ने संगठन में पारदर्शिता, संविधान के अनुरूप कार्यप्रणाली और बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना था कि संगठन के महत्वपूर्ण विषयों पर आमसभा में खुली चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए।
विरोध करने वाले सदस्यों ने सदस्यता प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सदस्यता देने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, जिससे आगामी चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. सदस्यों ने दावा किया कि वर्ष 2022 में गठित 25 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति के 16 सदस्यों ने अध्यक्ष एवं महासचिव की कार्यशैली पर असहमति जताते हुए हस्ताक्षरयुक्त पत्र संगठन के ट्रस्टी एवं संरक्षकों को सौंप दिया है।
बैठक के बाद सदस्यों ने संगठन में संविधानसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित करने, सदस्यता प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने की मांग दोहराई। इस घटनाक्रम के बाद उत्कल एसोसिएशन के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।
“इस संबंध में अध्यक्ष डॉ. श्रीधर प्रधान एवं महासचिव तरुण मोहंती का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।”

