53 ने लिया था नामांकन पत्र, अंतिम समय तक केवल 14 ने किया जमा; देर रात ‘गुपचुप नामांकन’ की आशंका से मचा हड़कंप
जमशेदपुर : उत्कल एसोसिएशन के आगामी चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया के बीच नामांकन को लेकर उठे गंभीर सवालों ने पूरे समाज में हलचल मचा दी है। समाज के कई वरिष्ठ एवं जागरूक सदस्यों ने चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. चुनाव प्रभारी द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कुल 53 सदस्यों ने कार्यालय से नामांकन पत्र प्राप्त किए थे। वहीं मंगलवार, 28 जुलाई की रात 8 बजे तक केवल 14 अभ्यर्थियों ने ही अपने नामांकन पत्र जमा किए।

समय सीमा के बाद नामांकन लेने की आशंका, कार्यालय पर लगा ताला…….
इसी बीच समाज के कुछ सदस्यों एवं विरोधी पक्ष ने आशंका जताई है कि पूर्व महासचिव तरुण महंती द्वारा निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद अपने समर्थकों के नामांकन पत्र स्वीकार किए जा सकते हैं। इस आशंका के चलते कार्यालय के बाहर लगे लोहे के ग्रिल पर ताला लगा दिया गया है. सदस्यों का कहना है कि अब यह ताला केवल प्रशासन की मौजूदगी में ही खोला जाना चाहिए, ताकि पूरी चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमसम्मत बनी रहे।
महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल…..
समाज के सदस्यों का दावा है कि कार्यालय के अंदर वाले दरवाजे पर भी ताला लगा हुआ है तथा चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज एक अलमारी में रखे गए हैं, जिस पर पूर्व महासचिव का नियंत्रण बताया जा रहा है। इसे लेकर दस्तावेजों की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
नियमावली के अनुसार 25 निर्विरोध सदस्य जरूरी……
उत्कल एसोसिएशन की नियमावली के मुताबिक कार्यकारिणी गठन के लिए 25 सदस्यों का निर्विरोध चुना जाना आवश्यक है। वर्तमान में केवल 14 वैध नामांकन मिलने की स्थिति में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है और अब सभी की निगाहें एसडीओ के निर्देशों पर टिकी हैं।
12 वर्षों के कार्यकाल को लेकर भी उठे सवाल……
समाज के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया है कि तरुण महंती पिछले 12 वर्षों से महासचिव पद पर बने हुए हैं। उनके कार्यकाल को लेकर विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों तथा आर्थिक अनियमितताओं के आरोप समय-समय पर उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सदस्यों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
बुद्धिजीवियों से आगे आने की अपील…….
समाज के वरिष्ठ एवं जागरूक सदस्यों ने सभी बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले पर गंभीरता से विचार करें और निष्पक्ष, पारदर्शी तथा नियमसम्मत चुनाव सुनिश्चित कराने में सहयोग दें। उनका कहना है कि समाज का विकास तभी संभव है जब नेतृत्व ईमानदार, जवाबदेह और जनहित के प्रति समर्पित लोगों के हाथों में हो।
लोकतंत्र सवेरा इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।