लेखक : अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)
करीब दो दशक पहले तक हार्ट अटैक को आमतौर पर बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली ने इस धारणा को तेजी से बदल दिया है। आज 30 और 40 वर्ष की उम्र के प्रोफेशनल्स, व्यस्त जीवनशैली के बीच काम कर रहे उद्यमी और युवा वयस्क भी मोटापा, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारणों से हृदय संबंधी जोखिमों का सामना कर रहे हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में दर्ज की गई बीमारियों में हृदय और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की हिस्सेदारी 25.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बताता है कि हृदय स्वास्थ्य अब केवल उम्रदराज लोगों की चिंता नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय परिवारों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है।

बढ़ता हृदय रोग, बढ़ती आर्थिक चिंता……..
हृदय रोगों का बढ़ता खतरा केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। किसी भी हृदय संबंधी आपात स्थिति के साथ अस्पताल में भर्ती, जांच, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार, फॉलो-अप और इलाज के बाद की देखभाल जैसे कई खर्च जुड़ सकते हैं. देश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक तकनीक के विस्तार से हृदय रोगों के उन्नत उपचार तक पहुंच बढ़ी है, लेकिन इन उपचारों की लागत भी काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में हृदय स्वास्थ्य की योजना बनाते समय चिकित्सा के साथ-साथ आर्थिक तैयारी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
रोकथाम से शुरू होती है हृदय की सुरक्षा……
हृदय रोगों के बढ़ते मामलों के पीछे बदलती जीवनशैली एक महत्वपूर्ण कारक है। लंबे समय तक काम करना, शारीरिक गतिविधियों में कमी, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, डायबिटीज के बढ़ते मामले, तनाव और नियमित स्वास्थ्य जांच की अनदेखी जोखिम को बढ़ा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अस्वास्थ्यकर खान-पान, तंबाकू का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और शराब के हानिकारक सेवन को हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल करता है. हृदय रोगों का एक बड़ा खतरा यह है कि इनके कई जोखिम कारक लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के बने रह सकते हैं। उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियां अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती हैं और कई बार गंभीर स्थिति सामने आने के बाद ही उनका पता चलता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है।
हेल्थ इंश्योरेंस को भी मानें हार्ट हेल्थ प्लानिंग का हिस्सा…..
हृदय स्वास्थ्य की योजना केवल बीमारी से बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सक्रिय जीवनशैली, संतुलित भोजन, तनाव प्रबंधन और नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों के लिए आर्थिक तैयारी भी जरूरी है. यहीं हेल्थ इंश्योरेंस की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अस्पताल में भर्ती और कार्डियक ट्रीटमेंट से जुड़े खर्चों के अलावा कई आधुनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाएं वार्षिक हेल्थ चेक-अप, टेली-कंसल्टेशन, वेलनेस प्रोग्राम और क्रॉनिक डिजीज मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराती हैं. प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और हेल्थ इंश्योरेंस का संयोजन लोगों को एक ओर स्वास्थ्य जोखिमों की नियमित निगरानी में मदद करता है, वहीं दूसरी ओर अचानक सामने आने वाली मेडिकल इमरजेंसी के आर्थिक बोझ को कम करने में सहायक हो सकता है।
आधुनिक हेल्थ इंश्योरेंस में प्रिवेंटिव केयर पर जोर……
बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के साथ हेल्थ इंश्योरेंस की भूमिका भी व्यापक होती जा रही है। अब बीमा योजनाएं केवल अस्पताल में भर्ती होने के खर्च तक सीमित नहीं हैं। कई योजनाओं में मेडिकल प्रैक्टिशनर की सलाह के अनुसार वार्षिक प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप, टेली-कंसल्टेशन, इन-क्लिनिक डॉक्टर कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक टेस्ट, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच जैसे लाभ शामिल हो सकते हैं. ऐसी सुविधाएं नियमित स्वास्थ्य जांच के खर्च को कम करने में मदद कर सकती हैं और लोगों को बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
कार्डियक इमरजेंसी में आर्थिक सुरक्षा भी जरूरी…..
यदि अचानक कार्डियक घटना होती है, तो उपचार में इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन, आईसीयू केयर, एडवांस्ड मेडिकल प्रोसीजर, फॉलो-अप कंसल्टेशन, एम्बुलेंस तथा अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च शामिल हो सकते हैं. पॉलिसी की शर्तों के अनुसार उपलब्ध कवरेज ऐसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध होने पर मरीज और परिवार को तत्काल आर्थिक व्यवस्था करने के बजाय समय पर चिकित्सा देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली के साथ आर्थिक तैयारी भी जरूरी……
भारत में हृदय रोग एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में हृदय स्वास्थ्य की रणनीति केवल बीमारी से बचने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता, तनाव प्रबंधन और समय पर चिकित्सकीय सलाह के साथ पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज भी महत्वपूर्ण हो सकता है. आखिरकार, बेहतर हृदय स्वास्थ्य का मतलब केवल लंबी और स्वस्थ जिंदगी की तैयारी नहीं, बल्कि अचानक आने वाली चिकित्सा परिस्थितियों के लिए परिवार को आर्थिक रूप से तैयार रखना भी है। स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा—दोनों पर एक साथ ध्यान देकर ही भविष्य के जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सकता है।
